



भटनेर पोस्ट पॉलिटिकल डेस्क.
राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र एक सितंबर से शुरू होने जा रहा है। सत्ता पक्ष जहां सत्र को सुचारू रूप से चलाने की रणनीति बना रहा है, वहीं विपक्ष ने भी सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने साफ संकेत दिए हैं कि कांग्रेस इस बार शिक्षा, कानून व्यवस्था, किसानों की समस्याओं से लेकर राइजिंग राजस्थान जैसी योजनाओं पर सरकार को कठघरे में खड़ा करेगी।

जूली का कहना है कि छह महीने में सरकार ने जितने वादे किए थे, उन पर अमल नहीं हुआ। शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। अंग्रेजी माध्यम स्कूल बंद करने की बात तो सरकार ने की, लेकिन नए स्कूल-कॉलेज खोलने या इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने में विफल रही। यूनिवर्सिटीज की हालत खराब है और छात्रसंघ चुनाव तक नहीं करवा पा रही है। जूली के मुताबिक, हम हर क्षेत्रवार मुद्दों को इकट्ठा कर सदन में जोरदार तरीके से उठाएंगे।

पिछले सत्र में विपक्ष और स्पीकर के बीच टकराव सुर्खियों में रहा था। इस बार भी कांग्रेस ने इस मुद्दे को सर्वदलीय बैठक में उठाने का ऐलान किया है। जूली का आरोप है कि स्पीकर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हैं। उन्होंने कहा, ‘यदि विधानसभा को पुराने नियम-कायदों और परंपराओं से चलाना है तो विपक्ष की आवाज सुनी जानी चाहिए। हमारे प्रदेशाध्यक्ष पर सदन में की गई टिप्पणी को हटाया नहीं गया, जबकि माफी मांग ली गई थी। स्पीकर को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, वरना हम मजबूरन विरोध करेंगे।’

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के मंत्री सवालों का जवाब नहीं देते। जूली का कहना है कि सत्ता पक्ष का दायित्व है कि जनता से जुड़े सवालों पर सदन में जवाब दे, और इसमें स्पीकर की जिम्मेदारी भी तय होती है। जूली बोले-‘हमने राइजिंग राजस्थान को लेकर सवाल पूछा था लेकिन आज तक उसका जवाब नहीं मिला। कानून-व्यवस्था, ईआरसीपी और किसानों के मुद्दों पर सवाल किए जाते हैं, लेकिन जवाब टाल दिए जाते हैं। यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।’

राजस्थान में बढ़ते अपराधों को लेकर भी विपक्ष हमलावर है। जूली ने मुख्यमंत्री पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि गृह विभाग उनके पास है लेकिन वे अधिकतर समय दिल्ली या पार्टी प्रचार में बिताते हैं। राजस्थान में रोजाना दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं। हनुमानगढ़ टाउन में आठ साल की बच्ची का शव सूटकेस में मिला, भीलवाड़ा, उदयपुर, जोधपुर, अलवर में अपराध की खबरें लगातार आती हैं। पुलिस अवैध माइनिंग और बजरी के कारोबार में लगी है। यह स्थिति बताती है कि सरकार ने आंखें मूंद ली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के नेताओं की गुंडागर्दी पर भी पुलिस चुप रहती है।

पिछले सत्र में कई बिल प्रवर समिति को भेजे गए थे। जूली का कहना है कि यह पहली बार है जब एक ही बिल को दो-दो बार प्रवर समिति में भेजना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि परंपरा के अनुसार विपक्ष से राय लिए बिना ही समिति में सदस्यों की नियुक्ति की जा रही है और बैठकों का आयोजन तक नहीं हो रहा। प्रवर समिति का मकसद बिल की कमियों पर गहन चर्चा करना होता है, लेकिन इस सरकार ने इसे औपचारिकता बना दिया है।

टीकाराम जूली ने साफ किया कि कांग्रेस इस बार हर मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाएगी। उनका कहना है कि सरकार अगर जनता की आवाज दबाने की कोशिश करेगी तो विपक्ष सदन में भी और बाहर भी संघर्ष करेगा। हमारा काम है जनता की समस्याओं को उठाना और हम हर हाल में यह जिम्मेदारी निभाएंगे। राजस्थान विधानसभा का यह सत्र कई मायनों में अहम माना जा रहा है। एक ओर सरकार अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष ने साफ कर दिया है कि इस बार सवालों की बौछार और विरोध के बीच सरकार को जवाबदेह ठहराया जाएगा।



