



भटनेर पोस्ट डेस्क.
हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित मुख्य डाकघर परिसर में लोहड़ी पर्व हर्षाेल्लास, पारंपरिक उत्साह और सामाजिक सौहार्द के वातावरण में मनाया गया। ठिठुरती सर्दी के बीच जलती लोहड़ी की अग्नि ने जहां मौसम में गर्माहट घोली, वहीं कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच अपनत्व, परंपरा और सामूहिकता का भाव भी प्रबल दिखाई दिया। इस अवसर पर प्रधान डाकपाल पुरुषोत्तम कुक्कड़, सहायक डाक अधीक्षक ताराचंद पुरोहित और वरिष्ठ कर्मचारी अरुण बंसल ने लोहड़ी पर्व के सांस्कृतिक, सामाजिक और मानवीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से लोहड़ी जलाकर की गई। कर्मचारियों ने अग्नि में मूंगफली, रेवड़ी, तिल और गजक अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे परिसर में पारंपरिक गीतों की गूंज और उल्लास का माहौल रहा।
प्रधान डाकपाल पुरुषोत्तम कुक्कड़ ने कहा कि लोहड़ी हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक जीवन शैली का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, मेहनत के सम्मान और मिल-बांटकर खुशियां मनाने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि जैसे किसान सालभर मेहनत के बाद फसल के रूप में फल पाता है, वैसे ही हर कर्मचारी की मेहनत संस्था को मजबूत बनाती है। लोहड़ी हमें सिखाती है कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं।

सहायक डाक अधीक्षक ताराचंद पुरोहित ने कहा कि लोहड़ी उत्तर भारत का प्रमुख लोकपर्व है, जो सर्दी के अंत और नए कृषि चक्र की शुरुआत का संकेत देता है। यह पर्व भाईचारे, सहयोग और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन कार्यालयीन तनाव को कम करते हैं, आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं और कार्यस्थल को परिवार जैसा माहौल प्रदान करते हैं। डाक विभाग भी सेवा, समर्पण और विश्वास की परंपरा पर खड़ा है, और लोहड़ी जैसे पर्व इन मूल्यों को और सुदृढ़ करते हैं।

वरिष्ठ कर्मचारी अरुण बंसल ने कहा कि लोहड़ी अग्नि, प्रकाश और आशा का पर्व है। अग्नि नकारात्मकता को जलाकर सकारात्मकता का संचार करती है। उन्होंने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में परंपराओं को जीवित रखना जरूरी है, क्योंकि यही हमारी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखती हैं। उन्होंने सभी कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे अपनी संस्कृति पर गर्व करें और अगली पीढ़ी तक इसे पहुंचाएं।

लोहड़ी का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह पर्व विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के उत्तरी क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह नई फसल के स्वागत और सूर्य के उत्तरायण होने के उल्लास का प्रतीक है। लोहड़ी की अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करना, लोकगीत गाना और प्रसाद बांटना सामूहिकता और आनंद का संदेश देता है।

कार्यक्रम में अमनदीप सिंह, हनुमान सिंह भाटी, धनराज, अंकुर बिश्नोई, राजेश कुमार, शिव राम कृष्ण, शिव कुमार, कैलाश रमाना, लीला भिंडासरा, कोमल, सुनीता सोनी, कालूराम, गोपाल राम, चानन राम, मुकेश कुमार, भूपेंद्र कुमार, राजेंद्र सिंह, विजय यादव, हरीश ढालीया, भजन लाल, बजरंग मीणा, धर्मचंद मीणा, महेंद्र सिंह शेखावत, हरीश कुक्कड़, मुन्ना, रमेश अरोड़ा, कमल शाक्य सहित बड़ी संख्या में डाककर्मी उपस्थित रहे। सभी ने एक-दूसरे को लोहड़ी की शुभकामनाएं दीं और मिठाइयों का आदान-प्रदान किया। समारोह के अंत में सभी ने मिलकर डाक विभाग की सेवा भावना, आपसी सहयोग और सौहार्द को बनाए रखने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि परंपराएं केवल घरों तक सीमित नहीं, बल्कि कार्यस्थलों को भी संस्कार और संवेदनशीलता से भर देती हैं।


