





भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
मानसून की सक्रियता के बीच घग्घर नदी का नाम आते ही हनुमानगढ़ और आसपास के इलाकों के लोगों के मन में डर की लहर दौड़ जाती है। पिछली बार के हालात और तटबंधों की कमजोरी अब भी लोगों की यादों में ताजा हैं। यही कारण है कि जब भी पानी का बहाव बढ़ता है, तो बाढ़ का खतरा सामने खड़ा नजर आता है। लेकिन इस बार विशेषज्ञों ने साफ किया है कि हालात पहले जैसे नहीं हैं और घबराने की कोई वजह नहीं है।

31 अगस्त को सिंचाई विभाग की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि नदी में पानी का दबाव बढ़ा जरूर है, लेकिन यह अभी पूरी तरह नियंत्रण में है। विभाग के अनुसार गुल्लाचिक्का में 37,893 क्यूसेक, खनौरी में 8,400 क्यूसेक, चांदपुर में 4,150 क्यूसेक, ओटू में 26,000 क्यूसेक, घग्घर साइफन में 16,930 क्यूसेक, नाली बैड में 5,000 क्यूसेक, आरडी 42 जीडीसी में 11,880 क्यूसेक, आरडी 133 जीडीसी में 5,500 क्यूसेक, एसओजी ब्रांच में 1,550 क्यूसेक और आरडी 158 जीडीसी में 5,450 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन आंकड़ों के आधार पर फिलहाल किसी भी तरह के खतरे की स्थिति नहीं बन रही। जल संसाधन विभाग के पूर्व एक्सईएन और घग्घर मामलों के जानकार इंजीनियर सहीराम यादव ने ‘भटनेर पोस्ट डॉट कॉम’ से बातचीत में कहा, ‘घग्घर में इस समय कोई खतरा नहीं है। पानी विजयनगर तक पहुंच चुका है। बंधों की हालत पहले जैसी कमजोर नहीं है। साल 2023 में जिस स्तर पर मरम्मत और मजबूतीकरण का काम हुआ है, उससे स्थिति पहले से काफी अनुकूल हो चुकी है। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि हालात बिगड़ रहे हैं।’

यादव के मुताबिक नाली बैड की क्षमता 5,000 क्यूसेक है और फिलहाल उतना ही पानी वहां से गुजर रहा है। इसका मतलब है कि सिस्टम पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं है। वहीं सेमनाला की स्थिति को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां 20,000 क्यूसेक तक पानी की गुंजाइश है। इंजीनियर सहीराम यादव कहते हैं, ‘जब तक वहां इस सीमा तक आवक नहीं होती, तब तक चिंता की कोई बात नहीं है। हां, बंधों की लगातार निगरानी जरूरी है ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटा जा सके।’

हालांकि, विशेषज्ञों की ओर से खतरे से इनकार किए जाने के बावजूद इलाके के लोगों में चिंता का माहौल बना हुआ है। बीते वर्षों में आई बाढ़ की यादें उन्हें डरा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तटबंधों की मजबूती पर भरोसा करना कठिन है, क्योंकि बारिश और नदियों की अप्रत्याशित स्थिति कभी भी हालात बदल सकती है।

इसी आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव, एडीएम उम्मेदीलाल मीणा, एसडीएम मांगीलाल सुथार सहित सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार निचले इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। प्रशासन ने संबंधित विभागों को 24 घंटे निगरानी बनाए रखने और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

साल 1995 में घग्घर का पानी कई गांवों और हनुमानगढ जंक्शन में तबाही मचा चुका है। तटबंधों में दरारें और निकासी व्यवस्था की खामियां उस दौरान खुलकर सामने आई थीं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उन अनुभवों से मिली सीख के बाद अब व्यवस्थाएं बेहतर की गई हैं। खासकर 2023 में किए गए कार्यों ने तटबंधों को मजबूत किया है और निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाया है।

घग्घर नदी का बहाव और उसका खौफ हनुमानगढ़वासियों के जीवन का हिस्सा बन चुका है। हालांकि इस बार स्थिति ज्यादा चिंताजनक नहीं है। आंकड़े और विशेषज्ञों की राय साफ इशारा करती है कि फिलहाल खतरे की कोई आशंका नहीं है। फिर भी प्रशासन और जनता दोनों के लिए सतर्कता सबसे जरूरी है, क्योंकि पानी की स्थिति किसी भी वक्त बदल सकती है।
हनुमानगढ़ के लोगों के मन में भले ही डर कायम हो, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान हालात नियंत्रण में हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में मौसम का रुख कैसा रहता है और प्रशासन किस तरह चौकसी बरकरार रखता है।



