





भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा भारत से आने वाले उत्पादों पर 50 फीसद टैरिफ लगाने का फैसला 27 अगस्त से लागू हो गया है। इसके चलते अमेरिका को निर्यात होने वाले भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिसका सीधा असर करीब 48.2 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति का सबसे बड़ा झटका राजस्थान को लग सकता है, क्योंकि यहाँ से अमेरिका को बड़ी मात्रा में ज्वेलरी, रेडीमेड वस्त्र और हस्तकला का निर्यात होता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जयपुर के ज्वेलरी, हस्तकला और वस्त्र उद्योग से जुड़े निर्यातक अमेरिकी टैरिफ को लेकर गहरी चिंता में हैं। जयपुर में मौजूद दो विशेष आर्थिक क्षेत्र मुख्य रूप से अमेरिकी बाजार को ही सप्लाई करते हैं, इसलिए इन पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। निर्यातकों के अनुसार, अतिरिक्त शुल्क और महंगाई की वजह से अमेरिका को निर्यात में करीब 50 फीसद तक की गिरावट हो सकती है।

आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो वर्षों में ही राजस्थान के ज्वेलरी निर्यात में भारी गिरावट आ चुकी है। वर्ष 2023-24 में जहाँ निर्यात 82,000 करोड़ रुपये का था, वहीं 2024-25 में यह घटकर 60,000 करोड़ रुपये पर सिमट गया। जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट्स प्रोमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष राजीव जैन ने आशंका जताई है कि अतिरिक्त ड्यूटी की वजह से भारत का लगभग आधा निर्यात घट जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी खरीदार अब यूरोपीय देशों से सामान खरीदना शुरू कर देंगे, जिससे भारतीय ज्वेलरी उद्योग को करारा झटका लगेगा।

राजस्थान की पहचान हस्तकला से भी जुड़ी है, लेकिन इस क्षेत्र की स्थिति भी गंभीर हो सकती है। एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के पूर्व प्रमुख दिलीप बैद के मुताबिक, राज्य के हैंडीक्राफ्ट सेक्टर में करीब 5-6 लाख लोग रोजगार पर निर्भर हैं। अमेरिकी टैरिफ से निर्यात घटने पर इनमें से हजारों नौकरियां प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कारोबार पर ही नहीं, बल्कि कारीगरों और उनके परिवारों की रोज़ी-रोटी पर भी बड़ा संकट है।

रेडीमेड गारमेंट सेक्टर भी इस संकट से अछूता नहीं रहेगा। राजस्थान में इस क्षेत्र में दो लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। गारमेंट एक्सपोर्टर्स ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष रक्षित पोद्दार ने कहा कि 50 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क से निर्यातक मुश्किल में आ जाएंगे। इसका असर केवल वस्त्र उद्योग पर ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े डाइंग, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी गहराई से पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि निर्यातकों को अपने कर्ज और एडवांस लौटाने में कठिनाई होगी। पोद्दार के अनुसार, इस स्थिति से रेडीमेड वस्त्र क्षेत्र में 50 प्रतिशत तक नौकरियों के चले जाने का खतरा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव केवल तात्कालिक नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर दीर्घकालीन होगा। इससे न केवल निर्यात घटेगा, बल्कि रोजगार, निवेश और उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। राजस्थान के निर्यातक पहले से ही बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक मंदी से जूझ रहे हैं, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर निर्यातकों के संरक्षण के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी। साथ ही वैकल्पिक बाजारों की तलाश, यूरोपीय देशों और खाड़ी देशों में निर्यात बढ़ाने तथा घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन देने की दिशा में तेजी से काम करना होगा।

अमेरिकी टैरिफ का असर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो राजस्थान के प्रमुख उद्योगोंकृज्वेलरी, वस्त्र और हस्तकलाकृको अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है। यह स्थिति सरकार, उद्योग जगत और समाज सभी के लिए चिंता का विषय है।



