






भटनेर पोस्ट डेस्क.
हनुमानगढ़ जंक्शन सिथत गोशाला गोविंदधाम में श्री गौशाला सेवा समिति की ओर से सात दिवसीय दुर्लभ सत्संग महोत्सव का पांचवां दिन श्रद्धा और भक्ति में सराबोर रहा। प्रांगण में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। जहां एक ओर भजन-कीर्तन की स्वर लहरियां गूंजती रहीं, वहीं दूसरी ओर स्वामी विजयानंद गिरि जी महाराज (ऋषिकेश वाले) के दिव्य प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को जीवन का सार समझाते हुए आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण कर दिया।

स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य जीवन में अशांति का मुख्य कारण उसकी ‘कामनाएं’ हैं। कामना का सामान्य अर्थ है मेरे मन की हो जाए, अर्थात यह होना चाहिए और यह नहीं होना चाहिए। जब व्यक्ति अपनी अपेक्षाओं और इच्छाओं के अनुसार जीवन की परिस्थितियों को ढालना चाहता है, तभी दुख और असंतोष जन्म लेता है।

स्वामी जी ने कहा कि सभी लोग शांति की तलाश में रहते हैं, परंतु सच्ची शांति तभी मिल सकती है जब इंसान कामनाओं का त्याग कर दे और ईश्वर की इच्छा को स्वीकार करने की आदत डाल ले। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि मनुष्य अपनी इच्छाओं के कारण ही दुःख के चक्रव्यूह में फंस जाता है। जब इंसान ‘जैसा है वैसा स्वीकार’ करने की प्रवृत्ति विकसित कर लेता है, तभी मन में स्थिरता आती है और जीवन सरल हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भक्ति और साधना ही आत्मा को निर्मल करती है तथा सच्चे सुख का मार्ग प्रशस्त करती है।

समिति अध्यक्ष इन्द्र हिसारिया ने बतायाकि 30 अगस्त तक चलने वाले इस सात दिवसीय सत्संग महोत्सव में प्रतिदिन दो सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। पहले सत्र में दोपहर 3 से 4 बजे तक भजन-कीर्तन होता है, जिसमें स्थानीय कलाकारों और मंडलियों द्वारा भक्तिरस की धारा बहाई जाती है। इसके बाद सायं 4 से 6 बजे तक स्वामी श्री विजयानंद गिरि महाराज का प्रवचन होता है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रांगण को आकर्षक ढंग से सजाया गया है तथा आरामदायक बैठने की विशेष व्यवस्था भी की गई है।

श्रद्धालुओं ने प्रवचनों को सुनने के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्वामी जी के शब्द आत्मा को शांति और ऊर्जा प्रदान करते हैं। उनके उपदेश जीवन की उलझनों को सुलझाने और मन को स्थिर करने का मार्ग दिखाते हैं। भक्तों ने इसे आत्मिक उन्नति का अद्वितीय अवसर बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले सिद्ध होते हैं।




