






डॉ. संतोष राजपुरोहित.
मानव सभ्यता का इतिहास केवल राजनैतिक बदलावों या भौतिक प्रगति तक सीमित नहीं है। समय-समय पर नई पीढ़ियों की सोच, उनके मूल्य और जीवन जीने का तरीका भी समाज की दिशा तय करते आए हैं। हर दौर में जन्मी पीढ़ियाँ अपने समय की तकनीक, अर्थव्यवस्था और संस्कृति से प्रभावित होकर आगे बढ़ी हैं और उसी आधार पर सामाजिक व आर्थिक नीतियों पर असर डाला है।

उदारता की पीढ़ी: यह पीढ़ी किसी तय जन्म वर्ष से नहीं जुड़ी, बल्कि सोच और व्यवहार से पहचानी जाती है। इसमें वे लोग शामिल हैं, जो अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लिए सोचते हैं। इनके लिए पैसा कमाना ही सबकुछ नहीं, बल्कि लोगों की मदद करना, दान देना और सबको साथ लेकर चलना अहम है। आर्थिक स्तर पर, इस सोच से साझा उपयोग वाली सेवाएँ (जैसे सामान या वाहन साझा करना), चंदा जुटाकर किसी काम को आगे बढ़ाना और समाजहित में काम करने वाली कंपनियों को बढ़ावा मिला।

मिलेनियल्स: यह पीढ़ी उस दौर में बड़ी हुई जब दुनिया तेजी से जुड़ रही थी और इंटरनेट आम होता जा रहा था। ये लोग तकनीक के मामले में निपुण हैं और नौकरी में केवल पैसा ही नहीं, बल्कि काम और निजी जीवन के बीच संतुलन चाहते हैं।
आर्थिक रूप से ये बचत से ज्यादा खर्च करने की ओर झुकते हैं और घुमने-फिरने, बाहर खाने-पीने और नए प्रयोग करने पर पैसा लगाना पसंद करते हैं। आज जो स्टार्टअप संस्कृति और ऑनलाइन खरीद-बिक्री का बड़ा बाज़ार है, उसमें इनका ही सबसे बड़ा योगदान है।

डिजिटल पीढ़ी: इस पीढ़ी का जन्म उस समय हुआ जब मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया पहले से मौजूद थे। इसलिए इन्हें असली मायनों में डिजिटल पीढ़ी कहा जाता है। ये तस्वीरों और छोटे-छोटे वीडियो जैसे तेज़ और आकर्षक माध्यमों को पसंद करते हैं। सामाजिक स्तर पर इनके लिए जाति, लिंग या रंग से ऊपर उठकर बराबरी और वैश्विक पहचान अहम है।
आर्थिक स्तर पर, ये नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय खुद काम करना, फ्रीलांसिंग और डिजिटल मंचों पर नया कंटेंट बनाना पसंद करते हैं। इसी वजह से आज गिग इकॉनमी, सोशल मीडिया पर प्रभाव जमाने वाले लोग और ऑनलाइन कारोबार तेजी से बढ़े हैं।

सामाजिक और आर्थिक असर: तीनों पीढ़ियों ने मिलकर समाज को नई दिशा दी है। उदारता की पीढ़ी ने दान और सहयोग की भावना को मजबूत किया। मिलेनियल्स ने परिवार और काम के बीच नया संतुलन दिखाया। डिजिटल ने बराबरी और सामाजिक न्याय के विचार को प्रमुख बनाया।

आर्थिक असर : उदारता की पीढ़ी ने साझा अर्थव्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा दिया। मिलेनियल्स ने नए कारोबार और ऑनलाइन बाज़ार को पंख दिए। और डिजिटल ने डिजिटल मंचों और स्वतंत्र कामकाज की राह खोली।
आज का समाज केवल तकनीकी बदलाव का नतीजा नहीं है, बल्कि अलग-अलग पीढ़ियों की सोच का संगम है। एक ने समाज को सहयोग और उदारता की राह दिखाई, दूसरे ने अनुभव और लचीलापन अहम बनाया, और तीसरे ने डिजिटल नवाचार और वैश्विक बराबरी को अपनाया। आने वाले समय में इन तीनों की साझा सोच से एक ऐसा समाज बनेगा, जो केवल उत्पादन और उपभोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साझेदारी, नई पहल और सामाजिक जिम्मेदारी पर खड़ा होगा।
-लेखक भारतीय आर्थिक परिषद के सदस्य हैं



