




भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
राजस्थान में एक बार फिर मॉक ड्रिल के जरिए युद्ध जैसे हालातों से निपटने की तैयारियों को परखा जाएगा। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार 29 मई को शाम 5 बजे पूरे राज्य में सायरन की गूंज सुनाई देगी। इस दौरान राज्यभर में एक साथ मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में प्रशासन और आमजन की तत्परता को परखना है। गृह विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को इसके लिए विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 7 मई को भी राज्यभर में मॉक ड्रिल की गई थी, जिसमें हवाई हमलों की चेतावनी के तहत सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया गया था। हालांकि, उस ड्रिल के दौरान कई जिलों से समन्वय की कमी, सूचना के अभाव और व्यवस्थाओं की धीमी प्रतिक्रिया जैसी खामियां सामने आई थीं। इन्हीं खामियों को सुधारने और व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए 29 मई को दोबारा मॉक ड्रिल करवाई जा रही है।
सिविल डिफेंस और प्रशासन ने शुरू की तैयारी
राज्य के सिविल डिफेंस विभाग ने इस मॉक ड्रिल को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। जोधपुर कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने बताया कि ‘गुरुवार को जिले में मॉक ड्रिल होगी। इससे नागरिकों और प्रशासन दोनों की तैयारी का मूल्यांकन हो सकेगा।’ वहीं बाड़मेर कलेक्टर टीना डाबी ने भी मॉक ड्रिल को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश मिलने की पुष्टि की है।

सीएम ने की सीमावर्ती जिलों के कलेक्टरों से वीसी
सीमावर्ती जिलों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन जिलों के कलेक्टरों के साथ विशेष चर्चा की। इस चर्चा के दौरान मॉक ड्रिल की सफलता, जन जागरूकता और आपातकालीन प्रबंधन की समीक्षा की गई। पाकिस्तान सीमा से सटे बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर व श्रीगंगानगर जैसे जिले खास फोकस में हैं।
भारत-पाकिस्तान के बीच फिर बढ़ा तनाव
इस पूरी कवायद के पीछे एक अहम कारण है भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। इस कार्रवाई में भारतीय सेना ने लगभग 100 आतंकियों को ढेर किया था। इस सैन्य कार्रवाई के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ऐसे में मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट एक्सरसाइज जैसे कदम सुरक्षा तैयारी का अहम हिस्सा बन गए हैं।

मॉक ड्रिल का मतलब
यह एक तरह की ‘पूर्वाभ्यास प्रक्रिया’ होती है, जिसमें यह परखा जाता है कि किसी आपातकाल (जैसे एयर स्ट्राइक, बम हमला, प्राकृतिक आपदा आदि) की स्थिति में प्रशासन और आमजन कितनी तेजी से और सही तरीके से प्रतिक्रिया देते हैं। इसमें इमरजेंसी सेवाएं, अस्पताल, पुलिस, होमगार्ड, सिविल डिफेंस और जनता की भूमिका तय होती है।
ब्लैकआउट एक्सरसाइज
ब्लैकआउट का अर्थ है कि एक निर्धारित समय के लिए पूरे क्षेत्र की बिजली बंद कर दी जाए, जिससे पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाए। इसका उद्देश्य यह होता है कि अगर दुश्मन देश हमला करे, तो अंधेरे के कारण वह सैन्य या नागरिक ठिकानों को निशाना न बना सके। यह रणनीति युद्धकालीन सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा होती है।

जनता से अपील: घबराएं नहीं, सहयोग करें
प्रशासन की ओर से आमजन से अपील की गई है कि 29 मई को शाम 5 बजे बजने वाले सायरन और होने वाली मॉक ड्रिल के दौरान कोई भी घबराए नहीं। यह एक अभ्यास है, जो आपकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। जनता को चाहिए कि वह प्रशासन के निर्देशों का पालन करे और अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की यह संयुक्त पहल केवल प्रशासनिक अभ्यास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से एक जरूरी कदम है। सीमावर्ती राज्य होने के कारण राजस्थान की यह भूमिका और अधिक अहम हो जाती है। ऐसे में मॉक ड्रिल को गंभीरता से लेना हम सभी की जिम्मेदारी है।


