



डॉ. संतोष राजपुरोहित.
भारत में मतदाता सूची केवल चुनावों में उपयोग होने वाला दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और आर्थिक विकास की दिशा तय करने वाला आधार स्तंभ है। एक सटीक, अपडेटेड और त्रुटिरहित मतदाता सूची राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करती है और इससे बनने वाली नीतियाँ देश की आर्थिक संरचना को सीधे प्रभावित करती हैं। वर्तमान में देशभर में चल रहा एसआईआर अर्थात विशेष संक्षिप्त पुननिरीक्षण इस संबंध को और अधिक प्रासंगिक बनाता है। इस अभियान के माध्यम से नए मतदाताओं के नाम जोड़ना, गलत प्रविष्टियाँ सुधारना, मृत व्यक्तियों के नाम हटाना और स्थानांतरण के आधार पर सूची को अद्यतन करना चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य है। अद्यतन मतदाता सूची लोकतंत्र की मजबूती तथा आर्थिक नीति-निर्माण की सटीकता दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

एक सटीक मतदाता सूची राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सही दिशा में ले जाती है। यदि सूची में त्रुटियाँ हों या नाम छूट जाएँ, तो कोई क्षेत्र वास्तविक जनसंख्या का सही प्रतिबिंब प्रस्तुत नहीं कर पाता, जिससे नीति-निर्माण विकृत हो सकता है। एसआईआर अभियान इस समस्या को दूर करते हुए राजनीतिक स्थिरता को मजबूत बनाता है, और राजनीतिक स्थिरता किसी भी अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक विकास की अनिवार्य शर्त है। जब सही प्रतिनिधि चुने जाते हैं, तब वे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार जैसी आर्थिक नीतियों में जनता की आवश्यकताओं को बेहतर रूप से अभिव्यक्त करते हैं। इस तरह एसआईआर राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता का सम्मिलित आधार तैयार करता है।

भारत में आर्थिक योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, मनरेगा, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन और विभिन्न पेंशन योजनाएँ, का क्रियान्वयन जनसंख्या-आधारित आंकड़ों पर निर्भर करता है। मतदाता सूची वयस्क आबादी का सबसे विश्वसनीय अनुमान देती है। यदि सूची अद्यतन न हो, तो योजनाओं के लिए संसाधनों का अधिक या कम आवंटन हो सकता है। एसआईआर अभियान इस डेटा को अधिक सटीक बनाते हुए योजनाओं की लक्षित पहुंच को प्रभावी बनाता है। इसके माध्यम से किस क्षेत्र में कितनी वयस्क आबादी है, कौन-से क्षेत्र में माइग्रेशन अधिक है और किस क्षेत्र में नए मतदाताओं की संख्या बढ़ रही है, इन सबका स्पष्ट संकेत मिलता है। यह जानकारी आर्थिक योजनाओं के बेहतर लक्ष्य निर्धारण में मदद करती है।

मतदाता सूची मानव पूँजी निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। जब कोई व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होता है, तो उसकी राजनीतिक भागीदारी और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ती है। एसआईआर अभियान विशेष रूप से 18 वर्ष के नए मतदाताओं को जोड़ने पर जोर देता है। यह युवा वर्ग कौशल विकास, शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता नीतियों का मुख्य आधार है। मतदाताओं की इस नई श्रेणी का राजनीतिक सशक्तिकरण दीर्घकाल में आर्थिक अवसरों और मानव पूँजी निर्माण को प्रभावित करता है। शोध बताते हैं कि जिन क्षेत्रों में मतदाता सूची अधिक सटीक होती है, वहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसी सेवाओं का क्रियान्वयन बेहतर होता है, क्योंकि वहाँ नागरिक शासन प्रक्रिया में अधिक सक्रिय रहते हैं।

चुनावी पारदर्शिता भी अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित करती है। निवेशक, चाहे विदेशी हों या घरेलू। राजनीतिक रूप से स्थिर और निष्पक्ष माहौल में ही निवेश करना पसंद करते हैं। एसआईआर अभियान मतदाता सूची को पारदर्शी, त्रुटिरहित और डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाता है, जिससे चुनावी प्रणाली में विश्वास बढ़ता है। एक पारदर्शी लोकतांत्रिक व्यवस्था निवेशकों को यह भरोसा देती है कि सरकारें जनमत के आधार पर चुनी गई हैं, और उनकी आर्थिक नीतियाँ दीर्घकालिक स्थिरता के अनुरूप होंगी। इस प्रकार एसआईआर भारत के निवेश वातावरण को भी मजबूत करता है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच विकास का असंतुलन भी मतदाता सूची की सटीकता से प्रभावित होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी की कमी, दस्तावेज़ों का अभाव और माइग्रेशन के कारण मतदाता सूची में त्रुटियाँ अधिक पाई जाती हैं। एसआईआर अभियान के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर, घर-घर सत्यापन करके और डिजिटल सुविधाओं के उपयोग पर जोर देकर इन त्रुटियों को कम किया जा रहा है। इससे ग्रामीण नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, और उनके क्षेत्रों में सड़क, बिजली, सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी ढांचे पर निवेश की मांग मजबूती से उभरेगी। इससे शहरी-ग्रामीण असमानता कम करने में मदद मिलेगी, जो कि किसी भी संतुलित अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।

अंततः यह स्पष्ट है कि मतदाता सूची और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। वर्तमान एसआईआर अभियान न केवल लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूत बना रहा है, बल्कि आर्थिक नीति-निर्माण, संसाधन आवंटन, मानव पूँजी विकास और निवेश वातावरण को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। सटीक मतदाता सूची के बिना न तो सही प्रतिनिधित्व संभव है और न ही मजबूत अर्थव्यवस्था का निर्माण। इसलिए एसआईआर अभियान लोकतंत्र और विकास दोनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और समसामयिक पहल है।
-लेखक भारतीय आर्थिक परिषद के सदस्य हैं




