





भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
राजस्थान की राजनीति में अक्सर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिलती है, लेकिन हनुमानगढ़ का लोकतांत्रिक इतिहास इससे अलग पहचान रखता है। यहां राजनीतिक संवाद में टकराव की बजाय संवाद और सहयोग की परंपरा रही है। इसी परंपरा का ताजा उदाहरण 26 अगस्त को हनुमानगढ़ में देखने को मिला, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप ने कांग्रेस विधायकों के समक्ष सार्वजनिक मंच से ही विपक्ष को अपनी ही सरकार के खिलाफ मुद्दा सौंप दिया।

फर्स्ट इंडिया चौनल के कार्यक्रम में बतौर अतिथि पहुंचे डॉ. रामप्रताप ने यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष व संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया और पीलीबंगा विधायक विनोद गोठवाल से मुखातिब होते हुए कहा, ‘आपकी भारी जिम्मेदारी है। विपक्ष में होना कोई खास बात नहीं, लेकिन आपको पाकिस्तान जा रहे पानी के मुद्दे पर आवाज बुलंद करनी चाहिए।’

उनके इस बयान से सभागार एक पल को सन्न रह गया। मंच पर मौजूद कांग्रेस खेमे के लोग भी चौंक गए कि आखिर भाजपा का वरिष्ठ नेता विपक्ष को सरकार के खिलाफ हथियार क्यों दे रहे हैं। यह दृश्य अपने आप में राजनीतिक रूप से असामान्य था, जिसने उपस्थित जनसमूह को हक्का-बक्का कर दिया।

पूर्व सिंचाई मंत्री डॉ. रामप्रताप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में बोलते हुए कहा कि यह एक गहरी त्रासदी है कि सोने जैसा पानी पाकिस्तान बहा ले जा रहा है, जबकि हमारे किसान अपनी फसलें पानी की कमी से बर्बाद होते देख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 80 हजार से एक लाख क्यूसेक पानी पाकिस्तान जा रहा है और उसे रोकने की कोई ठोस पहल नहीं हो रही।

उन्होंने यह भी कहा कि सूरतगढ़ में पानी का स्टोरेज पूरी तरह संभव है। यदि सही योजना हो, तो पानी का उपयोग राजस्थान के किसानों के लिए किया जा सकता है। लेकिन आज तक किसी ने इस दिशा में गंभीरता से काम नहीं किया। उन्होंने किसानों की हालत पर गहरी चिंता जताई और कहा कि जब किसान ही बर्बाद हो जाएगा तो फिर बचेगा क्या? हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले का पूरा व्यापार और रोजगार खेती पर आधारित है। अगर सिंचाई का संकट गहराया तो सामाजिक-आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा जाएगी।

उनकी इस टिप्पणी को केवल किसान हितैषी बयान न मानकर राजनीतिक सन्देश के रूप में भी देखा जा रहा है। क्योंकि डॉ. रामप्रताप ने एक तरह से विपक्ष को यह सलाह दी कि वह सत्ता की कमियों पर सवाल उठाए और किसानों की आवाज को और बुलंद करे।

खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई बार पाकिस्तान को जाने वाले पानी को रोकने का दावा कर चुके हैं। ऐसे में भाजपा के वरिष्ठ नेता का यह बयान से यह साफ है कि इस मसले पर सिर्फ बातें हो रही हैं, जमीनी स्तर पर किसानों की समस्या जस की तस बनी हुई है। खास बात है कि खेती-किसानी को लेकर डॉ. रामप्रताप की अच्छी समझ है और बतौर सिंचाई मंत्री उन्होंने नहरी तंत्र को सुधारने के लिए खूब प्रयास किए। किसान आज भी उन्हें याद करते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. रामप्रताप का यह बयान भाजपा की आंतरिक असहमति की ओर इशारा करता है। हालांकि इसे वे सीधे तौर पर पार्टी लाइन से विचलन कहना नहीं चाहेंगे, लेकिन इतना जरूर है कि इससे कांग्रेस को सियासी ‘ऑक्सीजन’ मिल गई है। जब खुद भाजपा का वरिष्ठ नेता मीडिया के मंच से विपक्ष को यह कहे कि ‘आपको यह मुद्दा उठाना चाहिए’, तो कांग्रेस के लिए यह सबसे बड़ा राजनीतिक तोहफा साबित हो सकता है।

दूसरी ओर, इस बयान से किसानों के बीच डॉ. रामप्रताप की छवि और भी प्रखर हो सकती है। वे पहले भी किसान हितों के मुखर पैरोकार रहे हैं और इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से उन्होंने अपने ‘फार्मर लीडर’ इमेज को और धार दी है।



