






गोपाल झा.
आसमान में छाए काले और घनेरे बादल। रुक-रुककर गिरती बूंदों की छनक और पवन के मधुर झोंके। हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर रविवार की सुबह कुछ ऐसी ही छटा लेकर उतरी। मौसम का यह बदलाव मानो तपते मन पर शीतल जलधारा का स्पर्श हो। भादो का महीना यूँ तो वर्षा ऋतु का स्वाभाविक अध्याय है, परंतु जब धरती प्यासी हो और बादलों की झुकी छतरी तिरछी होती हुई अँकवार भर ले, तब इसका सुख दूना हो जाता है।

शहर की गलियों से लेकर खेत-खलिहानों तक, हर जगह बादलों का मिज़ाज चर्चा का विषय है। बच्चों के लिए यह मौसम किसी उत्सव से कम नहीं। कभी बारिश में भीगते, कभी गली-मोहल्लों में कागज़ की नाव तैराते वे अपनी मासूमियत में मौसम को रंगीन बना देते हैं। बुज़ुर्ग भी इस फुहार में जीवन के पुराने दिनों को याद करते हैं। बरसों पहले की बरसात, मिट्टी की खुशबू और गाँव के पोखरों की छवियाँ उनकी आँखों में तैरने लगती हैं।

युवा पीढ़ी के लिए तो यह मौसम जैसे उमंग और उल्लास का नया अध्याय खोल देता है। कॉलेज के कैम्पस में, पार्कों की बेंचों पर, और नदी किनारे टहलते रास्तों पर बादलों की छाँव उनके सपनों को पंख देती है। हल्की बूंदाबांदी में टहलना, ठंडी हवा के झोंकों में गुनगुनाना और मनचाहे गीतों की धुन पर बह जाना, यह सब भादो के मौसम की अनमोल सौगातें हैं।

मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे तक हल्की बारिश की संभावना जताई है। इसका अर्थ यह भी है कि किसानों के लिए खेतों में नमी बनी रहेगी और फसलों को नई ऊर्जा मिलेगी। कपास, मूंगफली और बाजरे जैसी फसलें इस बरसात की बूंदों से खिल उठेंगी। किसान के माथे की लकीरें थोड़ी कम होंगी और उसका मन भी बादलों के साथ गुनगुनाने लगेगा।

प्रकृति का यह रूप केवल भौगोलिक परिघटना नहीं, बल्कि भावनाओं की तरंग भी है। बारिश की हर बूँद मनुष्य के भीतर छुपे संवेदनशील मन को जगाती है। यही कारण है कि कवियों ने बरसात को प्रेम, वियोग और आशा का प्रतीक बनाया है। हनुमानगढ़ की धरती भी इन दिनों कवितामय लगती है। जहाँ हवा की सरसराहट संगीत है, बूंदों की टपकन ताल है और बादलों की गरज पृष्ठभूमि का स्वर।

भादो का यह मौसम शहर की भागदौड़ को भी कुछ देर ठहरने पर विवश करता है। दफ्तर जाने वाले लोग भी खिड़कियों से झाँकते हुए बारिश की बूँदों को निहारते हैं, मानो कुछ पल के लिए ही सही, वे भी प्रकृति की इस गोद में खो जाना चाहते हों।
निश्चय ही, यह मौसम केवल आकाश और धरती का मिलन नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच रिश्ते की पुनः पुष्टि भी है। हनुमानगढ़ में छाए इन घने बादलों ने जैसे हर हृदय में ठंडक और हर चेहरे पर मुस्कान भर दी है।





