




रंजना झा.
मोह लेता मन मधुर मुस्कान से
और हार जाता, राधा नयन के वाण से।
लट उलझे हैं, कुंतल कारे घुँघरारे ,
श्याम तन ,कमलनयन,रस फूटे रसखान से।
नटवर नागर, बृज की गलियां, घूमे, बनके माखनचोर,
पीत वसन केशर चन्दन निकसे आभा ललित ललाम से।
मधुबन रास रचाबे कान्हा, प्रीत रंग में रमे हुए,
लीलाधर सुध बुध बिसराये बांध मुरलिया तान से।
राह निहारे गाय, गोपियाँ, यमुना तीर,
दरस न कोई और भाए, प्रीत जुड़े जब श्याम से।
प्रेम पिपासु प्रेम ही मांगे ,भाव न जाने जग की रीत,
मौन पढ़े है राधिका, जब मिले नयन सुजान से।
सबके हिय कृष्ण बसे, कृष्ण हृदय में राधा रानी,
प्रेम विकलता राधे मन की छुपी कहाँ घनश्याम से।



