





भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
राजस्थानी छात्र मोर्चा, राजस्थान व राजस्थानी रामलीला संस्थान, सूरतगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में ‘भासा री जोत जगावा; कार्यक्रम के तहत राजस्थानी साहित्य के विद्यार्थियों से संवाद कार्यक्रम का आयोजन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, 2डीओ विद्यालय प्रांगण में हुआ। अध्यक्षता उप प्राचार्य शाह रसूल राठ ने की। उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा साहित्य का इतिहास अनुपम है, राजस्थानी भाषा हमें अपनी जड़ों से, संस्कारों से, संस्कृति से जुड़ने व जोड़ने का महत्वपूर्ण उपक्रम है। राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता व राजभाषा का दर्जा मिलने से राजस्थान के युवाओं को शिक्षा,संस्कार से जुड़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसर ज्यादा मिलेंगे। शिक्षाविद् शाह रसूल राठ ने राजस्थानी साहित्य के विद्यार्थियों से राजस्थानी भाषा साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन व मान्यता का आह्वान किया। राजस्थानी साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार मनोज स्वामी ने राजस्थानी भाषा के विभिन्न पक्षों को रेखांकित करते हुए राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति को बचाये रखने के लिए राजस्थानी भाषा को राजभाषा व संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने पुरजोर आवश्यक बताया जिससे राजस्थान की पहचान अस्तित्व में स्वाभिमान का भाव बना रहे।

राजस्थानी छात्र मोर्चा के प्रदेश संयोजक व सहायक आचार्य डॉ. गौरीशंकर निमिवाळ ने राजस्थानी भाषा साहित्य के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए राजस्थानी साहित्य के विद्यार्थियों से समकालीन राजस्थानी साहित्य व प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी भाषा साहित्य संस्कृति विषय की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने न्यू एजुकेशन पॉलिसी-2020 में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा राजस्थानी में अक्षरशः देने व राजस्थान की प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में राजस्थानी भाषा साहित्य के प्रवेश पर बल दिया।

छात्र मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मांगीलाल प्रजापत ने छात्र-छात्राओं से राजस्थानी भाषा साहित्य का पूर्ण मनोयोग से अध्ययन अध्यापन कर राजस्थानी भाषा के संरक्षण व संवर्धन में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अध्यापक हरपाल सिंह ने किया।

इस अवसर पर विद्यालय परिवार के सदस्य श्रवणराम माहर, कृष्ण कुमार, शकुंतला कुमारी, दिनेश सारस्वत, दिनेश कुमार आदि मौजूद थे। व्याख्याता पदमचंद कंस्वा ने अतिथियों, वक्ताओं व विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। खास बात यह रही कि राजस्थानी रामलीला संस्थान, सूरतगढ़ के संस्थापक, वरिष्ठ साहित्यकार मनोज कुमार स्वामी ने राजस्थानी साहित्य की विभिन्न विधाओं की दर्जनों पुस्तके पुस्तकालय में भेंट स्वरूप विद्यालय परिवार सदस्यों को प्रदान की।



