






भटनेर पोस्ट डॉट कॉम.
हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर महज चंद घंटों की बरसात ने नगरपरिषद और जिला प्रशासन की विकास योजनाओं की पोल खोल दी है। बारिश थमे 12 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन सड़कों पर भरे पानी, कीचड़ और बदहाली के दृश्य शहरवासियों की नाराजगी को बयान करने के लिए काफी हैं। यह सिर्फ जलभराव की समस्या नहीं है, बल्कि यह शहर के विकास के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपयों के बावजूद ग़लत प्राथमिकताओं, घटिया प्लानिंग और भ्रष्टाचार की एक जीवंत तस्वीर है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह नज़ारा कहीं दूर-दराज़ का नहीं, बल्कि जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने की है। जब प्रशासन के दरवाज़े के बाहर हालात ऐसे हैं, तो शहर के बाकी हिस्सों की कल्पना सहज की जा सकती है।
जलभराव, जाम और गंदगी की त्रासदी
हनुमानगढ़ शहर की सड़कों पर जलजमाव आम बात हो गई है, लेकिन इस बार की बारिश के बाद हालात कुछ ज्यादा ही बिगड़े नजर आए। मुख्य बाजार, बस स्टैंड, दुर्गा मंदिर क्षेत्र, रेलवे स्टेशन रोड व टाउन ओवरब्रिज जैसे प्रमुख स्थानों पर जलभराव ने आवाजाही को बाधित कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया। अस्पताल पहुंचने में मरीजों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी।

‘पानी भरने से मेरा सारा सामान खराब हो गया। दुकान खोल भी नहीं पाए। यह हर बार होता है, पर कोई सुनवाई नहीं।’
रमेश कुमार, दुकानदार
‘हम तो अब पानी के निकलने का इंतज़ार नहीं, खुद रास्ता तलाशने की आदत डाल चुके हैं।’
ममता देवी, गृहिणी
खराब प्लानिंग और अधूरे नाले
नगर परिषद और जिला प्रशासन का दावा है कि नालों और ड्रेनेज सिस्टम पर पिछले पांच सालों में 50 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। नालों की सफाई मानसून शुरू होने के बाद की गई, जिससे बारिश में कचरे के कारण जाम की स्थिति बन गई। कई स्थानों पर नालों का निर्माण अधूरा है या तकनीकी रूप से दोषपूर्ण भी है। जल निकासी की कोई समेकित योजना नहीं है, जिससे पानी रुक कर आसपास के क्षेत्रों को प्रभावित करता है। पार्षदों और नेताओं द्वारा वोटबैंक के आधार पर योजनाएं बदल दी जाती हैं, जिससे मूल संरचना प्रभावित होती है।

‘नालों के निर्माण में जबरदस्त भ्रष्टाचार हुआ है। जहां ज़रूरत नहीं, वहां बना दिए गए, जहां ज़रूरत थी, वहां अनदेखी हुई।’
राजेश शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता।
योजनाबद्ध और ईमानदार विकास की दरकार
विशेषज्ञों का मानना है कि हनुमानगढ़ शहर को बरसात से बचाने के लिए तत्काल एवं दीर्घकालीन रणनीति की आवश्यकता है। ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया जाए जो पूरे शहर के ढलान, भूगर्भ और जल निकासी को ध्यान में रखते हुए बने। सभी वार्डों में ळप्ै आधारित मैपिंग के जरिए जलभराव क्षेत्रों की पहचान और समाधान सुनिश्चित किया जाए। स्थायी निगरानी कमेटी बनाई जाए जिसमें आम नागरिक, इंजीनियर और सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हों। मानसून से पहले हर साल प्री-मानसून ऑडिट और मॉक ड्रिल अनिवार्य की जाए। जन भागीदारी के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

गुस्सा और निराशा
शहरवासियों में इस बार आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक लोग नगरपरिषद और नेताओं की ‘सेवा भाव’ पर तंज कस रहे हैं। अगर कलेक्टर कार्यालय के बाहर पानी नहीं निकलता तो आम मोहल्लों का क्या हाल होगा? हर चुनाव में विकास के वादे होते हैं, लेकिन हर बरसात में वही बदहाली मिलती है। कुछ आरटीआई कार्यकर्ताओं ने नालों पर खर्च की गई राशि और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।




