

भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की आग का असर कूटनीति, सुरक्षा और आम जनजीवन यानी तीनों पर साफ दिखने लगा है। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति को ‘चिंताजनक’ बताते हुए स्पष्ट किया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ी तो उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह बात दिल्ली के हैदराबाद हाउस में कनाडा के पूर्व केंद्रीय बैंकर मार्क कार्नी से मुलाकात के बाद कही। भारत का रुख साफ है, समस्या का समाधान बातचीत और कूटनीति से निकले, गोलियों और बमों से नहीं।

इधर, जम्मू-कश्मीर में ईरान के सर्वाेच्च नेता खामेनेई की मौत को लेकर लगातार दूसरे दिन विरोध प्रदर्शन जारी रहे। श्रीनगर के बेमिना इलाके में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया। शोपियां, बारामूला और बांदीपोरा में बाजार बंद रहे, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी खामेनेई की मौत के विरोध में हालात बेकाबू होते दिखे। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन हिंसक हो गए। गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों को निशाना बनाया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम का गिलगित कार्यालय भी शामिल है। स्कर्दू में पुलिस अधीक्षक कार्यालय और कई सरकारी इमारतों में आगजनी की गई। हालात इतने बिगड़े कि फायरिंग की घटनाओं में सात प्रदर्शनकारियों की मौत और बारह से अधिक लोग घायल हो गए। अस्पतालों में आपातकाल घोषित किया गया है और गिलगित व स्कर्दू में उच्च स्तरीय सुरक्षा अलर्ट लागू है।

कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में भी खामेनेई की मौत के विरोध में भारी हंगामा हुआ। घुसपैठ की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों पर दूतावास परिसर के भीतर से गोलियां चलाई गईं। अब तक 23 लोगों की मौत और दस से अधिक के घायल होने की सूचना है। यह प्रदर्शन इमामिया छात्र संगठन की ओर से किया गया था, जिसने हालात को और विस्फोटक बना दिया।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष तथा पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर एक मार्च की रात प्रधानमंत्री आवास पर सुरक्षा मामलों की समिति की बैठक हुई। बैठक में गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष और वित्त मंत्री शामिल रहीं। चर्चा का केंद्र था, वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा, निकासी की संभावनाएं और बिगड़ते हालात से निपटने की रणनीति। फिलहाल पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है, जिससे चुनौतियां और बढ़ गई हैं।

प्रधानमंत्री ने सामाजिक मंच ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। भारत ने संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों की निंदा की और वहां रह रहे भारतीयों की देखभाल के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही भारत ने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता बताते हुए तनाव कम करने, शांति, सुरक्षा और स्थिरता के समर्थन पर जोर दोहराया।




