

गोपाल झा.
राजस्थान सरकार अब बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने आईएएस, आईपीएस, आरएएस और आरपीएस अधिकारियों की सूची पर गंभीरता से मंथन शुरू कर दिया है। यह कदम आगामी निकाय और पंचायतीराज चुनावों को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। सरकार चाहती है कि मैदान में ऐसा प्रशासनिक तंत्र खड़ा किया जाए जो स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर तालमेल बैठाकर जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचा सके और सरकार की छवि को मजबूत बनाए।

जानकारी के मुताबिक, इस फेरबदल में मंत्रियों, विधायकों और भाजपा के पराजित प्रत्याशियों तक से राय ली जा रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर जमीनी कार्यशैली और राजनीतिक तालमेल में समन्वय की कमी से जनता में असंतोष का माहौल बन रहा है। यही वजह है कि सरकार अब ऐसे अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है, जो जनता के बीच रहकर काम करें और राजनीतिक नेतृत्व के साथ मिलकर विकास की गति बढ़ाएं।

सीएमओ को विभिन्न जिलों से मिले फीडबैक में यह साफ संकेत मिला है कि कई जगहों पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जनता में असंतोष है। खासकर ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में योजनाओं की पहुंच कमजोर बताई जा रही है। सरकार चाहती है कि इस असंतोष को तुरंत दूर किया जाए ताकि निकाय और पंचायतीराज चुनाव से पहले जनता के बीच सकारात्मक संदेश जा सके। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से कहा है, ‘जनता की नब्ज समझो और उसी के अनुसार निर्णय लो।’

फेरबदल की प्रक्रिया में सरकार जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन का भी विशेष ध्यान रख रही है। अधिकारियों की नियुक्ति इस तरह से की जाएगी कि न केवल प्रशासनिक दक्षता बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता भी सुनिश्चित हो सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी निर्णय स्थानीय सामाजिक ताने-बाने के प्रतिकूल न जाए।

पार्टी रणनीतिकारों की निगाहें इस बार विशेष रूप से हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिलों पर टिकी हैं। यह इलाका बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। पिछले चुनावों में यहां पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा था। अब सरकार प्रशासनिक मोर्चे पर बदलाव कर इस समीकरण को अपने पक्ष में मोड़ना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार, इन जिलों में प्रशासन व पुलिस महकमे के दूसरी और तीसरी लाइन के अफसरों को बदलने पर मंथन चल रहा है। हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में कई संवेदनशील पदों पर लंबे समय से जमे अधिकारियों को हटाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फेरबदल सिर्फ नौकरशाही में ताजगी लाने की कवायद नहीं, बल्कि सरकार की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी है। चुनावी साल में जनता को यह संदेश देना जरूरी है कि सरकार सक्रिय है, निर्णय लेने में सक्षम है और जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, इस कदम से न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार आएगा बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों में भी ऊर्जा का संचार होगा।

सीएमओ सूत्रों की मानें तो सूची पर अंतिम मुहर इसी माह लग सकती है और नवंबर तक प्रशासनिक सर्जरी की कार्रवाई पूरी हो सकती है। फिलहाल विभागवार फीडबैक और क्षेत्रीय समीकरणों को मिलाकर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जैसे ही मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलेगी, तबादलों का आदेश जारी किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में इसे शहरी निकाय और पंचायतीराज चुनावों से पहले सरकार का सबसे बड़ा प्रशासनिक दांव बताया जा रहा है, जो यह तय करेगा कि आने वाले महीनों में जनता के बीच सरकार की साख किस दिशा में जाती है।





