



भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में इन दिनों एक नाम हर किसी की जुबान पर है, पुलिसकर्मी सुभाष मांझू। कारण है उनका वह साहसिक प्रयास, जिसने न केवल दो मजदूरों की जान बचाई, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे की डोर को और मजबूत कर दिया। 14 अगस्त की सुबह हनुमानगढ़ जंक्शन में सीवरेज चैंबर की सफाई के दौरान एक दर्दनाक हादसा हुआ। सफाई के लिए उतरे तीन मजदूर जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए। लापरवाह व्यवस्थाओं और सुरक्षा उपकरणों के अभाव ने पल भर में एक खुशहाल परिवार को मौत के साये में धकेल दिया। घटना स्थल पर अफरातफरी मच गई। एक मजदूर ने दम तोड़ दिया और दो अन्य की स्थिति गंभीर बनी रही।

इसी दौरान संयोग से पुलिसकर्मी सुभाष मांझू अपने पारिवारिक कार्य से गुजर रहे थे। अचानक उन्हें चीख-पुकार सुनाई दी। उन्होंने बिना देर किए वाहन रोका और घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। वहां का मंजर देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए, लेकिन मांझू ने घबराने के बजाय तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था कराई, मजदूरों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की और उनके जीवन को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए। उनके इस साहस और तत्परता ने दो जिंदगियों को मौत के मुंह से बाहर निकाला।

सुभाष मांझू के इस कार्य की चर्चा दूर-दूर तक फैल गई। लोग उन्हें ‘वास्तविक हीरो’ कहकर सम्मानित कर रहे हैं। गांव धोलीपाल में दो स्थानों पर ग्रामीणों ने उनका अभिनंदन किया। गांव की गौसेवा समिति गोशाला में आयोजित कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष राजेंद्र गोदारा ने कहा, ‘यदि सुभाष मांझू समय पर आगे न आते तो दो और घरों के चिराग बुझ सकते थे। उनका प्रयास अविस्मरणीय है।’ समिति की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

इसके बाद विधायक गणेशराज बंसल और गौ चिकित्सालय गोधाम धोलीपाल के अध्यक्ष इंद्र पूनिया ने भी मांझू का अभिनंदन किया। विधायक ने कहा, ‘हर नागरिक को सुभाष मांझू से प्रेरणा लेनी चाहिए। जीवन में चाहे आप जहां भी हों, मुश्किल घड़ी में साहस और मानवता का परिचय देना ही असली धर्म है। आज दो मजदूर उनके कारण नया जीवन पा रहे हैं।’
सम्मान से अभिभूत सुभाष मांझू ने कहा, ‘मैंने केवल अपना फर्ज निभाया। पुलिस की नौकरी में हमें सबसे पहले नागरिकों की सुरक्षा सिखाई जाती है। उस दिन भी मन में यही भाव था कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मैंने वही किया जो किसी भी नागरिक या पुलिसकर्मी को करना चाहिए था।’

गौरतलब है कि इस घटना के बाद लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास और भी गहरा हुआ है। अक्सर पुलिस को कठोर और बेरुखा मानने वाली आम जनता को इस घटना ने यह अहसास दिलाया कि पुलिस का असली स्वरूप नागरिकों की रक्षा और सेवा करना ही है। सुभाष मांझू जैसे कर्मठ और संवेदनशील पुलिसकर्मी समाज में यह संदेश दे रहे हैं कि वर्दी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि मानवता और करुणा का भी प्रतीक है।

जिले की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने भी मांझू को सम्मानित करने की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार उनकी तारीफ कर रहे हैं। पोस्ट और संदेशों में लोग लिख रहे हैं कि आज जब संवेदनाएं शिथिल हो रही हैं और लोग मदद से कतराते हैं, तब मांझू जैसे पुलिसकर्मी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।


