



रोहित अग्रवाल.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में दो बड़े आर्थिक और सामाजिक बदलावों के संकेत दिए। उनका यह भाषण न केवल तात्कालिक राहत देने वाला था, बल्कि देश के भविष्य की आर्थिक दिशा को भी दर्शाने वाला था। मोदी ने ऐलान किया कि इस दिवाली से पहले केंद्र सरकार ‘नई जेनरेशन का जीएसटी रिफॉर्म’ लागू करने जा रही है, जिससे आम जनता को टैक्स में व्यापक राहत मिलेगी। साथ ही, उन्होंने ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ की शुरुआत का भी ऐलान किया, जिसके तहत निजी क्षेत्र में पहली नौकरी पाने वाले युवाओं को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समय की मांग है कि जीएसटी दरों की समीक्षा हो और टैक्स संरचना को और सरल बनाया जाए। उनका यह बयान इस बात का संकेत देता है कि सरकार आने वाले हफ्तों में जीएसटी काउंसिल की बैठक में व्यापक संशोधन कर सकती है। संभावना है कि बेसिक आइटम्स पर जीएसटी दरों में कटौती की जाएगी, जिससे महंगाई के दबाव से जूझ रहे लोगों को राहत मिले।

एमएसएमई सेक्टर को विशेष रिलीफ पैकेज मिलेगा, ताकि छोटे और मझोले उद्योग अपनी उत्पादन लागत घटा सकें और प्रतिस्पर्धी बने रहें। टैक्स की जटिलताओं को कम करके फाइलिंग और अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा, जिससे व्यापारियों का समय और संसाधन बचेंगे। यदि यह सुधार लागू होते हैं, तो इसका सीधा असर उपभोक्ता कीमतों, व्यापारिक लागत और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा। टैक्स में कमी का अर्थ है बाजार में मांग में वृद्धि, जो अंततः उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा देगा।

मोदी ने अपने भाषण में कहा कि:देश के बेटे-बेटियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है।’ इसी सोच के तहत आज से प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत, निजी क्षेत्र में पहली नौकरी पाने वाले युवा (बेटे-बेटी) को सरकार की तरफ से 15,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। जो कंपनियां अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराएंगी, उन्हें भी इंसेंटिव दिया जाएगा। इस योजना से करीब 3.5 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बनने का अनुमान है। यह पहल न केवल नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए राहत है, बल्कि कंपनियों को भी रोजगार सृजन के लिए प्रेरित करेगी। निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ने का सीधा असर देश की उत्पादकता, नवाचार और खपत पर पड़ेगा।

मोदी ने अपने भाषण में कहा, ‘इस दिवाली में आपकी डबल दिवाली करने वाला हूं।’ उनका यह कथन केवल राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि एक आर्थिक संकेत है कि त्योहारों से पहले सरकार उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों को राहत देने की योजना बना रही है। जीएसटी दरों में कमी से त्योहारी सीजन में खरीदारी बढ़ेगी। रोजगार योजना से युवाओं की क्रय-शक्ति में वृद्धि होगी, जो बाजार को और भी सक्रिय बनाएगी। यह संयोजन मांग आधारित विकास को गति देगा, जो किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए स्थायी प्रगति का आधार होता है।

दोनों घोषणाओं के दूरगामी प्रभाव निम्न हो सकते हैं। यदि आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी दरें घटती हैं, तो आम उपभोक्ता को त्वरित राहत मिलेगी। सरकारी प्रोत्साहन से निजी क्षेत्र में भर्तियों की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे बेरोजगारी दर घट सकती है। टैक्स ढांचा सरल होने से उद्यमियों का भरोसा बढ़ेगा और निवेश का माहौल अनुकूल बनेगा। छोटे उद्योगों को रिलीफ मिलने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी रोजगार और आय के अवसर बढ़ेंगे।

यह दीगर बात है कि इन घोषणाओं को लेकर चुनौतियां भी कम नहीं है। हालांकि, इन योजनाओं की सफलता कई कारकों पर निर्भर करेगी। जीएसटी रिफॉर्म का मसौदा ऐसा होना चाहिए कि राज्यों की राजस्व हानि न हो, वरना विवाद खड़ा हो सकता है। रोजगार योजना में पारदर्शिता और निगरानी जरूरी है ताकि प्रोत्साहन राशि का दुरुपयोग न हो। अर्थव्यवस्था की वर्तमान वैश्विक चुनौतियों (मंदी, कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक व्यापार में मंदी) के बीच इन सुधारों के अपेक्षित परिणाम पाने के लिए सतत नीतिगत समर्थन आवश्यक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्रता दिवस पर की गई घोषणाएं न केवल तात्कालिक राहत देने वाली हैं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए आर्थिक दिशा तय करने वाली भी साबित हो सकती हैं। जीएसटी रिफॉर्म से जहां उपभोक्ता और व्यापारी दोनों को राहत मिलेगी, वहीं रोजगार योजना युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यदि ये सुधार पारदर्शिता और दक्षता के साथ लागू होते हैं, तो यह दिवाली वाकई ‘डबल दिवाली’ बन सकती है, एक, रोशनी की; और दूसरी, आर्थिक उम्मीदों की।
-लेखक कर सलाहकार व टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं


