




भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाल ही में दिए गए कुत्तों से संबंधित आदेश पर हनुमानगढ़ के भगत सिंह चौक पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन की अगुवाई ज्योति शर्मा, नीलकंवर, लक्ष्मी बहादुर, अम्बाली गोदारा और ईगल फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रशांत सोनी ने की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कुत्ते समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें केवल परेशानी या खतरे के रूप में देखना न्यायसंगत नहीं है। वक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पशु अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया। नेताओं ने कहा कि कुत्तों को मारने या उनसे दुर्व्यवहार करने की बजाय सरकार को सकारात्मक और ठोस कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने तीन प्रमुख सुझाव रखे, आवारा कुत्तों के लिए आश्रय गृह (शेल्टर होम) स्थापित करना, नसबंदी और टीकाकरण की व्यवस्था को और मजबूत करना और लोगों को सुरक्षित और मानवीय व्यवहार के लिए शिक्षित करना।
प्रशांत सोनी ने कहा कि भारत की संस्कृति सदैव से पशु-पक्षियों के प्रति करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश देती आई है। ऐसे में किसी भी आदेश के जरिए हिंसा या दमन को प्रोत्साहित करना असंवैधानिक ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ भी है। इस विरोध प्रदर्शन में युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और युवा कार्यकर्ताओं ने भागीदारी करते हुए नारेबाज़ी की और यह संदेश दिया कि आने वाली पीढ़ी पशु संरक्षण और मानवीय मूल्यों को लेकर गंभीर है।

ज्योति शर्मा ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव तभी संभव है जब नई पीढ़ी आगे आए और जागरूकता फैलाए। उन्होंने कुत्तों को केवल सुरक्षा या परेशानी का कारण मानने की मानसिकता बदलने का आह्वान किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और युवाओं ने नागरिकों के बीच पर्चे वितरित किए। इनमें यह संदेश दिया गया कि कुत्ते केवल सुरक्षा के प्रहरी नहीं, बल्कि निष्ठा और साथीपन के प्रतीक भी हैं।

प्रदर्शनकारियों ने लोगों को बताया कि रेबीज़ जैसी बीमारियों की रोकथाम हिंसा से नहीं, बल्कि नियमित टीकाकरण और जनजागरूकता से संभव है। उनका मानना था कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर काम करें तो इंसानों और कुत्तों के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व स्थापित हो सकता है। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में यह रैली पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि वे हमेशा कानूनी दायरे में रहकर ही अपनी बात रखेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने कहा कि कुत्तों की सुरक्षा और अधिकारों की लड़ाई किसी एक शहर या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

प्रशांत सोनी, ज्योति शर्मा, नील कंवर, लक्ष्मी बहादुर व अम्बाली गोदारा ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के मुताबिक, सरकार को शीघ्र ही बड़े स्तर पर ठोस नीति बनानी चाहिए ताकि न केवल कुत्तों की रक्षा हो सके बल्कि इंसानों और जानवरों के बीच बेहतर सामंजस्य भी कायम किया जा सके। प्रदर्शनकारियों ने यह भी घोषणा की कि आने वाले दिनों में प्रदेश स्तर पर बड़े जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इन अभियानों के जरिए लोगों को पशु अधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और मानवीय सह-अस्तित्व की भावना से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। नेताओं ने कहा कि अगर समाज और सरकार दोनों मिलकर काम करें तो कुत्तों के प्रति हिंसा, दुर्व्यवहार और उपेक्षा की मानसिकता को बदला जा सकता है।

