




भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
हनुमानगढ़ विधायक गणेश राज बंसल पर कथित रूप से गलत तरीकों से विधायक बनने का आरोप लगाते हुए भाजपा प्रत्याशी रहे अमित चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यानी अब ये दोनों राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी सुप्रीम कोर्ट में आमने-सामने होंगे। इस मामले में अमित चौधरी ने न्याय की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है। यह याचिका राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध प्रस्तुत की गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि विधायक बनने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिससे न केवल निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा प्रभावित हुई, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी ठेस पहुंची है। याचिका में यह प्रश्न उठाया गया है कि क्या कथित प्रक्रियागत खामियों और नियमों के उल्लंघन के बावजूद निर्वाचन को वैध ठहराया जा सकता है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, इस प्रकरण की सुनवाई 23 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना एवं न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने अपने तर्क विस्तार से रखे और मामले की संवेदनशीलता तथा इसके दूरगामी प्रभावों की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया। याचिकाकर्ता का पक्ष यह रहा कि यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल एक व्यक्ति या एक निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाएगा।

याचिकाकर्ता अमित चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह, अजय अग्रवाल, आदर्श अग्रवाल, विष्णु कांत (एओआर), मोहित सोनी, कोनार्क, मिलिंद राय, अभिषेक डागर एवं सार्थक सिंह ने पैरवी की।
अधिवक्ताओं ने दलील दी कि निर्वाचन से जुड़ी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों का पालन किया गया या नहीं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को महत्वपूर्ण मानते हुए प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। यह नोटिस देरी माफी आवेदन (कंडोनेशन ऑफ डिले) तथा मुख्य विशेष अनुमति याचिका दोनों पर जारी किया गया है। साथ ही, न्यायालय ने दस्ती नोटिस की अनुमति भी प्रदान की है, जिससे याचिकाकर्ता प्रतिवादी पक्ष को सीधे नोटिस तामील करा सके। इस आदेश को कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि न्यायालय मामले की सुनवाई को गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहता है।

माननीय न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 05 मई 2026 की तिथि निर्धारित की है। उस दिन प्रतिवादी पक्ष को अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। जवाब दाखिल होने के बाद न्यायालय यह तय करेगा कि मामले में आगे किस प्रकार की सुनवाई की जाए और क्या किसी अंतरिम आदेश की आवश्यकता है।

याचिकाकर्ता अमित चौधरी का कहना है कि यह विवाद किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया की शुचिता, पारदर्शिता और लोकतंत्र की गरिमा से जुड़ा हुआ है। उनका तर्क है कि यदि चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों की समय रहते और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो इससे आम नागरिकों का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास कमजोर हो सकता है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। प्रतिवादी पक्ष से जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई में स्थिति और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है। तब तक यह मामला न्यायिक विचाराधीन है और सभी संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।








