



भटनेर पोस्ट पॉलिटिकल डेस्क.
हनुमानगढ़ की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा विधानसभा में उठा। विधायक गणेषराज बंसल ने विधानसभा में हनुमानगढ़ जिला चिकित्सालय की बदहाल स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा से संबंधित मांगों पर बोलते हुए कहा कि हनुमानगढ़ का राजकीय जिला चिकित्सालय आधुनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने में अक्षम हो चुका है और तत्काल पुनर्निर्माण व विस्तार की जरूरत है। हनुमानगढ़ राजकीय जिला चिकित्सालय का मुख्य भवन वर्ष 1978 में निर्मित किया गया था। वर्तमान में यह भवन अत्यधिक जर्जर हो चुका है और मरीजों, चिकित्सकों व कर्मचारियों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा भवन के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। इसी भवन में ऑपरेशन थियेटर, अस्थि रोग, मेडिसिन, डायलिसिस, रेडियोलॉजी सहित कई महत्वपूर्ण वार्ड संचालित हो रहे हैं, जिससे कभी भी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

विधायक ने कहा कि जिला चिकित्सालय की वर्तमान व भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए पुराने भवन को ध्वस्त कर एक नवीन, आधुनिक मातृत्व भवन का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इससे महिलाओं और नवजात शिशुओं को सुरक्षित व बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। हनुमानगढ़ जिला चिकित्सालय में कार्डियक केयर यूनिट की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण गंभीर हृदय रोगियों को अन्य शहरों में रेफर करना पड़ता है। यह स्थिति समय और जीवन दोनों के लिए घातक साबित होती है। विधायक ने कम से कम 20 बेड की कार्डियक केयर यूनिट तत्काल शुरू करने की मांग रखी।

विधानसभा में यह भी बताया गया कि जिले में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद जिला चिकित्सालय में ट्रॉमा सर्जरी यूनिट की सुविधा नहीं है। गंभीर घायलों को समय पर विशेषज्ञ उपचार न मिलने से जान का खतरा बढ़ जाता है। अतः हनुमानगढ़ में ट्रॉमा सर्जरी यूनिट की स्थापना की आवश्यकता बताई गई। विधानसभा क्षेत्र के गांवों पक्का भादवां, चोहिलांवाली, हिरणावाली, नवां, रोड़ावाली, फतेहगढ़ खिलेरीवास, उत्तरमसिंहवाला व मानुका उपकेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में क्रमोन्नत किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

विधायक गणेशराज बंसल ने बताया कि बजट में दुर्घटना से मृतकों के शव को सम्मानपूर्वक घर तक पहुंचाने के लिए निःशुल्क सुविधा की घोषणा की गई है, जो सराहनीय है। लेकिन प्रदेश की मोर्चरियों में पोस्टमार्टम प्रक्रिया में सहायक के रूप में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी या बाहरी अस्थायी व्यक्तियों से काम लिया जा रहा है, जो नियमों के अनुरूप नहीं है। प्रदेश के राजकीय चिकित्सालयों में हर वर्ष 20 हजार से अधिक पोस्टमार्टम होते हैं, लेकिन स्थायी पदों के अभाव में जवाबदेही तय नहीं हो पाती। इसलिए मोर्चरी सहायकों के पद स्वीकृत किए जाने की मांग की गई।

ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों, जीवनरक्षक दवाओं और एम्बुलेंस सेवाओं का भारी अभाव बताया गया। कई केंद्रों पर एम्बुलेंस जीवनरक्षक सुविधाओं से युक्त नहीं हैं, जिससे मरीजों को निजी साधनों या झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भर होना पड़ता है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ता है और जान का जोखिम भी।

हनुमानगढ़ मेडिकल कॉलेज के जंक्शन परिसर में कक्षाओं और छात्रावासों में फर्नीचर की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टरों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। विधायक ने कॉलेज में पर्याप्त फर्नीचर और स्टाफ उपलब्ध कराने की मांग की। विधानसभा में उठाए गए इन मुद्दों से स्पष्ट है कि हनुमानगढ़ जिले में स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक और त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है। यह केवल भवन या उपकरणों का प्रश्न नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है।







