





भटनेर पोस्ट डेस्क.
हनुमानगढ़ का सांस्कृतिक परिवेश उस समय हिंदीमय हो उठा, जब लायंस क्लब भटनेर ने टाउन स्थित व्यापार मंडल बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक अनूठे आयोजन की श्रृंखला रची। विद्यालय की बालिकाओं ने अपनी लेखनी और वाणी से ऐसी गूँज भरी, जिसने न केवल विद्यालय प्रांगण बल्कि उपस्थित जनसमूह के हृदय को भी हिंदीमय कर दिया।

प्रतियोगिता का स्वरूप साधारण नहीं था। यह केवल लेखन और पठन की कला का मंच नहीं, बल्कि हिंदी की विरासत को संजोने का एक सामूहिक प्रयास था। छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाषा की धारा पीढ़ियों के बीच सतत प्रवाहित है। उनकी रचनात्मक प्रस्तुतियाँ कभी कविता के रूप में तो कभी गद्य-पाठ के स्वर में वातावरण में गूँज उठीं। हिंदी की मिठास और गहनता से परिपूर्ण ये स्वर निश्चय ही हिंदी दिवस की आत्मा को जीवंत कर रहे थे।

आयोजन में शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। मुख्य अतिथि व्यापार मंडल शिक्षा समिति के अध्यक्ष अजय सराफ ने हिंदी को राष्ट्र की आत्मा और पहचान बताते हुए कहा, ‘यह भाषा हमें संस्कारों और एकता की डोर में बाँधती है, यही हमारी अस्मिता का मूल स्रोत है। हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का जीता-जागता प्रतीक है।’

मंच पर निदेशक प्यारेलाल गोयल, जोन चेयरमैन महक गर्ग, वरिष्ठ साहित्यकार एवं वृक्ष मित्र नरेश मेहन, संरक्षक दिवेश नागपाल, तथा रोटरी क्लब विज़न के अध्यक्ष आशीष गुप्ता भी विराजमान थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता लायंस क्लब भटनेर के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने की और संचालन का दायित्व सचिव दिनेश अरोड़ा ने निभाया। उनके ओजस्वी शब्दों और सहज शैली ने पूरे समारोह को एक धारा में बाँधे रखा।


प्रतियोगिता की सबसे उल्लेखनीय झलक तब सामने आई, जब विजेता छात्राओं को पुरस्कार स्वरूप हिंदी का समृद्ध ‘शब्दकोश’ भेंट किया गया। यह केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि एक संदेश था कि भाषा की गहराई को समझने और साधने का सबसे सशक्त साधन उसका शब्द-संसार है। सबने इस पहल की सराहना की।

कार्यक्रम में विशेष आकर्षण रहा हिंदी व्याख्याता एवं लेखिका डॉ. ज्योति यादव का सम्मान। उन्हें ‘हिंदी रत्न’ अलंकरण से नवाज़ा गया। इस अवसर पर उनकी पुस्तक का विमोचन भी हुआ, जिसे साहित्य-प्रेमियों ने आत्मीयता से सराहा। यह क्षण हिंदी की साधना और उसकी सार्थकता का जीवंत प्रतीक बन गया। वरिष्ठ साहित्यकार नरेश मेहन ने कहा, ‘हिंदी हमारी आत्मा और संस्कृति की भाषा है। यदि हम इसे संरक्षित और संवर्धित नहीं करेंगे तो यह मानो अपनी ही जड़ों से विमुख हो जाने जैसा होगा। नई पीढ़ी को प्रेरित करना ही आज का सबसे बड़ा साहित्यिक उत्तरदायित्व है।’ जोन चेयरमैन महक गर्ग ने छात्राओं की रचनात्मकता को सराहते हुए कहा कि प्रतियोगिता जैसे आयोजन युवाओं में आत्मविश्वास और भाषा के प्रति अपनत्व को जन्म देते हैं। वास्तव में यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आत्मा और अभिव्यक्ति के मेल का उत्सव था।

लायंस क्लब भटनेर के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने कहा, ‘हिंदी दिवस की यही सार्थकता है कि हम हिंदी को अपने जीवन में आत्मसात करें। यह एकमात्र भाषा है, जो पूरी दुनिया में भारतीयता की पहचान कराती है। लायंस क्लब समाजोपयोगी गतिविधियों के साथ-साथ हिंदी जैसी समृद्ध भाषा के प्रोत्साहन के लिए सदैव तत्पर रहेगा।’ समापन क्षणों में जब छात्राओं ने ‘हिंदी हमारी पहचान’ विषय पर स्वरचित कविताएँ और निबंध प्रस्तुत किए, तो पूरा वातावरण हिंदी की भावधारा से सराबोर हो गया। हर शब्द, हर पंक्ति में राजभाषा के प्रति अटूट प्रेम और निष्ठा झलक रही थी। इस अवसर पर क्लब सदस्य चंदन कंडा, विकास कामरा, संतोष अरोड़ा, विद्यालय की प्राचार्या संजू गाड़िया, कॉलेज प्राचार्या डॉ. नीलम गौड़, वीएम पब्लिक स्कूल की प्राचार्या किरण राठौड़, तथा अनेक सदस्य और शिक्षाविद् उपस्थित रहे।




