



गोपाल झा.
सोमवार की दोपहर हनुमानगढ़ पुलिस मुख्यालय में अजीब-सा मंज़र था। वर्दी की सख़्ती के बीच दिलों की नर्मी, अनुशासन के बीच जज़्बात, और उत्सव के शोर में छुपी विदाई की ख़ामोश सिसकियाँ। जिला पुलिस अधीक्षक हरिशंकर अपने नए दायित्व के लिए श्रीगंगानगर रवाना हो रहे थे, जहां उन्होंने बतौर एसपी पदभार ग्रहण किया।
इधर, पुलिस मुख्यालय हनुमानगढ़ परिसर में सुबह से ही रौनक थी। अधिकारियों और जवानों के चेहरों पर जोश था, आंखों में अपनापन। हरिशंकर के सिर पर राजस्थान की आन, बान और शान का प्रतीक साफ़ा बांधा गया। फूल मालाओं से उन्हें इस कदर सराबोर किया गया कि वह सम्मान से अधिक मोहब्बत का इज़हार लग रहा था। फिर उन्हें घोड़े पर बिठाया गया। यह रस्म नहीं, बल्कि उस क़द्रदानी का ऐलान था, जो उन्होंने अपने कार्यकाल में कमाई थी।

डीजे पर जैसे ही गीत गूंजा, ‘हो जाएगी तेरी बल्ले-बल्ले’ तो पुलिसकर्मियों का उत्साह देखने लायक था। तालियों की गड़गड़ाहट, थिरकते क़दम और खिलखिलाते चेहरे बता रहे थे कि यह खुशी किसी अफ़सर के जाने की नहीं, बल्कि उस नेतृत्व की है, जिस पर सबको फ़ख़्र था। कुछ दूरी तक हरिशंकर घोड़े पर ही आगे बढ़े। वह सफ़र मानो एक पैग़ाम था कि यह अफ़सर हमेशा अपनी टीम के साथ चला, आगे-आगे।
लेकिन हर खुशी के साए में एक वेदना भी होती है। जैसे ही श्रीगंगानगर के लिए रवानगी का वक़्त आया और आईपीएस हरिशंकर गाड़ी में बैठने लगे, माहौल बदल गया। अभी तक जो चेहरों पर मुस्कान थी, वे आंखें नम हो गईं। कई पुलिसकर्मियों की पलकों पर ठहरे आंसू बिना कहे बहुत कुछ बयान कर रहे थे। यह दर्द था, जो अल्फ़ाज़ का मोहताज नहीं होता।

एसपी हरिशंकर खुद भी जज़्बात से भर आए। उन्होंने कहा, ‘हनुमानगढ़ के लोगों को मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं, कानून का पालन करने वाले, एक-दूसरे को इज़्ज़त देने वाले। मेरी दुआ है कि हनुमानगढ़ के लोग हमेशा सेहतमंद रहें और सुकून के साथ ज़िंदगी जिएं।’ उनकी आवाज़ में शुक्रगुज़ारी भी थी और जुदाई की कसक भी।
इससे पहले आयोजित विदाई समारोह में एएसपी अरविंद बिश्नोई, डीएसपी मीनाक्षी सहारण, जंक्शन थाना प्रभारी रामचंद्र कस्वां, यातायात थाना प्रभारी अनिल चिंदा सहित अन्य अधिकारी और कार्मिकों ने एसपी के तौर पर हरिशंकर के कार्यकाल को अविस्मरणीय बताया। सबने कहा कि उनके नेतृत्व में पुलिस महकमे ने सिर्फ़ कानून-व्यवस्था ही नहीं संभाली, बल्कि टीमवर्क और भरोसे की एक मिसाल भी कायम की।
पुलिसकर्मियों ने ‘भटनेर पोस्ट डॉट कॉम’ से बातचीत में एसपी हरिशंकर को आला दर्जे का रणनीतिकार और बेहतरीन टीम लीडर बताया। एक अधिकारी ने कहा, ‘वे सख़्ती और नरमी का सही तवाज़ुन जानते हैं। प्यार से काम करवाना उनकी सबसे बड़ी ख़ूबी है। यही वजह रही कि उन्होंने जो टीम बनाई, उसने हर मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया। फील्ड ऑपरेशन हों या आंतरिक समन्वय,हर जगह एकजुटता और आत्मविश्वास नज़र आया।’
उनके कार्यकाल में जवानों को यह एहसास हुआ कि वे सिर्फ़ आदेश मानने वाले नहीं, बल्कि एक साझा मिशन का अहम हिस्सा हैं। उनकी बात सुनी जाती है, उनके काम की क़द्र होती है। शायद इसी वजह से यह विदाई सिर्फ़ औपचारिक नहीं रही, यह दिल से दी गई रुख़्सती थी।
सचमुच, हनुमानगढ़ पुलिस मुख्यालय में जो तस्वीर उभरी, उसने यह साबित कर दिया कि कुछ अफ़सर आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ अपने पीछे एक दौर, एक याद और एक मिसाल छोड़ जाते हैं। साफ़ा, घोड़ा, संगीत और नाच, इन सबके बीच जो सबसे अहम था, वह था इज़्ज़त, एहतिराम और मोहब्बत।
अब हरिशंकर श्रीगंगानगर में नई ज़िम्मेदारी संभाल चुके हैं। हनुमानगढ़ में उनका नाम, उनका काम और उनका अंदाज़ हमेशा याद किया जाएगा। यह विदाई दुआओं के साथ शुरू हुआ एक नया सफ़र है उस अफ़सर का, जिसने वर्दी के साथ-साथ दिलों की हिफ़ाज़त भी की।




