




भटनेर पोस्ट एजुकेशन डेस्क.
एसआरएस प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, जिला हनुमानगढ़ ने शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए आदेशों का विरोध जताया है, जिसमें विभाग ने आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत पढ़ने वाले विद्यार्थियों के खातों में पाठ्यपुस्तकों की राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) करने और स्कूलों को पीएसपी पोर्टल पर जन आधार अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो विद्यालयों को पूर्ण भरण-पोषण राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा।
एसोसिएशन का कहना है कि यह आदेश अनुचित और अनावश्यक है, क्योंकि सत्र 2024-25 की पाठ्यपुस्तकें पहले ही विद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों को वितरित कर दी गई हैं। इसके अतिरिक्त, विभागीय पैनल द्वारा भौतिक सत्यापन के दौरान भी इन पुस्तकों का सत्यापन पूरा हो चुका है। ऐसे में किताबों की राशि विद्यार्थियों के खातों में स्थानांतरित करने का आदेश तर्कसंगत नहीं है।

एसोसिएशन के जिला महासचिव भारत भूषण कौशिक ने कहा कि यहां बात केवल ₹202 की नहीं है, बल्कि शिक्षा के नियमों और सिद्धांतों की है। जब विद्यालयों ने समय पर किताबें वितरित कर दी हैं और विभागीय सत्यापन भी हो चुका है, तो इस प्रकार का फरमान जारी करना शिक्षण संस्थानों पर अनावश्यक दबाव बनाने जैसा है। यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम की मूल भावना के भी विरुद्ध है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को सुगम और बाधारहित शिक्षा उपलब्ध कराना है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि विभाग आने वाले शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी करना चाहता है, तो उस पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन वर्तमान सत्र में जब सारी प्रक्रियाएं पूर्ण हो चुकी हैं, तब इस प्रकार की बाध्यता पैदा करना केवल भुगतान में देरी करने का प्रयास प्रतीत होता है।

जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में एसोसिएशन ने आंदोलन की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है। संगठन का कहना है कि यदि विभाग ने आदेश वापस नहीं लिया तो व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें और शिक्षण संस्थानों के हित में निर्णय लें। एसोसिएशन का यह भी कहना है कि वे शिक्षा के अधिकार अधिनियम का सम्मान करते हैं, परंतु नियमों का दुरुपयोग कर विद्यालयों पर अनावश्यक वित्तीय दबाव बनाना स्वीकार्य नहीं है।


