



डॉ. संतोष राजपुरोहित.
भारत की कर व्यवस्था में सुधार का सफर लगातार जारी है। वर्ष 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू कर देशभर में करों की जटिलता को कम करने का प्रयास किया गया। हालांकि, इसके बाद भी टैक्स दरों और प्रक्रियाओं को लेकर असंतोष बना रहा। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली के अवसर पर जीएसटी 2.0 का संकेत देकर जनता को राहत देने की दिशा में नया कदम उठाया है। यह प्रस्ताव केवल कर ढांचे को सरल बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि महंगाई से जूझ रही जनता को वास्तविक तोहफ़ा भी है।

सरकार की मीडिया रिपोर्ट बताती है कि जीएसटी 2.0 में टैक्स स्लैब घटाकर वस्तुओं को सस्ता करने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में 5फीसद, 12फीसद, 18फीसद और 28फीसद के चार प्रमुख स्लैब हैं। नए प्रस्ताव के अनुसार, 10 लाख वस्तुओं पर टैक्स में लगभग 10 फीसद की कटौती की जाएगी। अधिकतम टैक्स दर को 7 फीसद तक सीमित करने पर विचार हो रहा है। अगर ऐसा होता है तो इस बदलाव का असर सीधा उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। रोज़मर्रा के सामान जैसे पैकेज्ड फूड, साबुन, टूथपेस्ट, कपड़े, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक वस्तुएँ, जो अभी 12फीसद या 18फीसद जीएसटी स्लैब में आती हैं, वे सस्ती होकर 10 फीसद या उससे नीचे की श्रेणी में आ सकती हैं।

महंगाई के इस दौर में हर परिवार अपने मासिक बजट को संतुलित करने के दबाव में है। यदि घरेलू उपयोग की वस्तुएँ 10 फीसद तक सस्ती होती हैं, तो इसका सीधा लाभ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा। उदाहरण के लिए, जो परिवार हर महीने 15-20 हजार रुपये केवल रोज़मर्रा की जरूरतों पर खर्च करता है, उसे सैकड़ों रुपये की बचत होगी। यह बचत सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को बढ़ाएगी।

व्यापारी और उद्योग जगत लंबे समय से जीएसटी की जटिलताओं की शिकायत करते रहे हैं। अलग-अलग स्लैब और जटिल रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया उनके लिए बोझ बनी हुई है। जीएसटी 2.0 से यह उम्मीद है कि दरें कम और सरल होंगी, जिससे व्यापार करना आसान होगा। टैक्स चोरी और नकली बिलों की प्रवृत्ति भी घटेगी। सबसे अहम बात यह है कि सरल व्यवस्था से छोटे और मझोले कारोबारियों को प्रोत्साहन मिलेगा।

हालांकि टैक्स दरों में कटौती से प्रारंभिक चरण में सरकार की जीएसटी से होने वाली आय कम हो सकती है, लेकिन दीर्घकाल में यह व्यवस्था राजस्व बढ़ाने का कारण बनेगी। जब वस्तुएँ सस्ती होंगी तो खपत बढ़ेगी और खपत बढ़ने से उत्पादन तथा रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इस तरह यह कदम अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा। दीपावली भारतीय संस्कृति में खुशियों और नई शुरुआत का प्रतीक है। ऐसे में जीएसटी 2.0 की घोषणा केवल आर्थिक सुधार नहीं बल्कि जनता के प्रति संवेदनशीलता का भी संदेश है। जब सरकार महंगाई और रोज़मर्रा की समस्याओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेती है, तो यह लोगों के मन में भरोसा पैदा करता है।

जीएसटी 2.0 केवल कर दरों में कटौती तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके साथ ही, रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल व सहज बनाना होगा। छोटे कारोबारियों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करना आवश्यक होगा ताकि वे इस नई व्यवस्था का लाभ उठा सकें। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय को और मज़बूत बनाना होगा ताकि किसी प्रकार की असमानता न रहे।
जीएसटी 2.0, यदि प्रस्तावित रूप में लागू होता है, तो यह भारतीय कर प्रणाली को और अधिक न्यायसंगत और उपभोक्ता केंद्रित बनाएगा। इससे न केवल आम आदमी को राहत मिलेगी, बल्कि व्यापारियों, उद्योगों और सरकार सभी को लाभ होगा। दीपावली पर मोदी सरकार का यह कदम वास्तव में हर घर की खुशियों को दोगुना कर सकता है। इस सुधार के साथ भारत की अर्थव्यवस्था एक नई रफ्तार पकड़ सकती है और ‘अच्छे दिन’ का सपना और अधिक निकट आ सकता है।
-लेखक भारतीय आर्थिक परिषद के सदस्य हैं



