





डॉ. एमपी शर्मा.
गणेश जी केवल पूजन के देवता नहीं हैं, बल्कि उनके रूप और प्रत्येक चिन्ह में गहरे जीवन-सूत्र छिपे हुए हैं। उनकी सूंड से लेकर बड़े कान, छोटे नेत्र और चूहे की सवारी तक, हर प्रतीक हमें जीवन जीने का व्यावहारिक संदेश देता है। वे सिखाते हैं कि लचीलेपन, धैर्य, संयम, त्याग और परिश्रम से ही असली सफलता और सुख मिलता है। इसीलिए उन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता और मंगलकारी कहा जाता है। गणपति का स्मरण केवल पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला मार्गदर्शन है।
बेशक, उनके रूप और चिन्ह केवल सौंदर्य का विषय नहीं हैं, बल्कि उनमें जीवन का गूढ़ दर्शन और व्यवहारिक संदेश छिपा हुआ है। यदि हम इन चिन्हों को समझकर जीवन में अपनाएँ, तो कठिन से कठिन राह भी सरल हो सकती है।

सूंड: गणेश जी की लंबी और लचीली सूंड इस बात का प्रतीक है कि जीवन में हमें लचीलापन और विवेक रखना चाहिए। सूंड से वे सुई भी उठा सकते हैं और वृक्ष भी उखाड़ सकते हैं। यानी छोटी-छोटी बातों को भी महत्व दें और बड़े कार्यों का भी साहसपूर्वक सामना करें।

बड़ा पेट: उनका विशाल उदर धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक है। सुख-दुःख, निंदा-प्रशंसा, मान-अपमान, सबको सहजता से पचाना ही जीवन का असली ज्ञान है। यानी हर परिस्थिति को समता भाव से स्वीकार करें।

चूहे की सवारी: गणेश जी का वाहन चूहा है। यह हमें सिखाता है कि सबसे छोटा और तुच्छ दिखने वाला भी महान कार्य कर सकता है। चूहा इच्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रण का प्रतीक है। साथ ही यह अज्ञान रूपी जाल को काटता है। जिस प्रकार चूहा किसी जाल को कुतरकर जीव को मुक्त कर देता है, वैसे ही गणेश जी हमें अज्ञान, मोह और भ्रम से मुक्त कर ज्ञान और विवेक का मार्ग दिखाते हैं। मतलब, गणपति की शरण लेकर मनुष्य अपने जीवन के अज्ञान और भ्रम से छुटकारा पा सकता है।

हाथ में अंकुश (गजांकुश): अंकुश नियंत्रण का प्रतीक है। यह बताता है कि जीवन में इच्छाओं और वासनाओं पर अंकुश लगाना जरूरी है। यानी आत्मसंयम ही सच्ची शक्ति है।

हाथ में पोथी (शास्त्र): गणेश जी के हाथ में ग्रंथ या पोथी ज्ञान और विद्या का प्रतीक है। यानी भौतिक संपदा के साथ-साथ आध्यात्मिक और शास्त्रीय ज्ञान भी आवश्यक है।

माथे पर सिंदूर: सिंदूर उत्साह, मंगल और विजय का प्रतीक है। यानी जीवन में सदैव सकारात्मकता और ऊर्जा बनाए रखें।
बड़े कान: गणेश जी के बड़े कान इस बात का प्रतीक हैं कि हमें अधिक सुनना चाहिए और कम बोलना चाहिए। यानी सुनने वाला ही सच्चा ज्ञानी बनता है।

छोटे नेत्र: गणेश जी के छोटे नेत्र गहराई से देखने की प्रेरणा देते हैं। यानी सतही न होकर हर बात की गहराई को समझें।
एकदंत (एक ही दाँत): गणेश जी का एक टूटा हुआ दाँत त्याग और बलिदान का प्रतीक है। अपूर्णता में भी पूर्णता ढूँढने का संदेश इसमें छिपा है। यानी जीवन में अपूर्णताओं के बावजूद संतोष और कार्यशीलता बनाए रखें।

मोदक: मोदक ज्ञान और आनंद का प्रतीक है। यह बताता है कि सच्चा सुख परिश्रम और साधना के बाद ही मिलता है। यानी परिश्रम से अर्जित फल ही मधुर और स्थायी होता है।
समग्र जीवन-दर्शन: गणेश जी के प्रत्येक अंग और प्रत्येक प्रतीक हमें जीवन की राह दिखाते हैं, लचीलेपन से जीना, सहनशील रहना, अज्ञान को काटकर ज्ञान को अपनाना, इच्छाओं पर नियंत्रण रखना, छोटे-बड़े सभी का सम्मान करना, और परिश्रम से आनंद प्राप्त करना। इसीलिए गणेश जी को ‘सिद्धि विनायक’ कहा जाता है, जो भक्त को विवेक, सफलता और मंगल प्रदान करते हैं।
-लेखक सीनियर सर्जन, सामाजिक चिंतक और आईएमए राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष हैं


