





डॉ. एमपी शर्मा.
‘राम….मेरे बेटे, मैं तुम्हें रोक नहीं पा रहा। मेरा हृदय चीख रहा है, पर वचन मुझे बाँध रहा है।’ दशरथ की आँखों से आँसू बहते हैं, आवाज़ काँप रही है। राम आगे बढ़ते हैं, पिता के चरणों में झुकते हैं, और धीमे स्वर में कहते हैं, ‘पिताश्री, आपका वचन ही मेरी आज्ञा है। सिंहासन से बड़ा मेरे लिए आपका सम्मान है।’ कुछ क्षणों में ही राजमहल का शोर, चुप्पी में बदल जाता है। एक राजकुमार, जो कल ताज पहनने वाला था, आज वन की ओर चला गया। क्या राम जैसा बनना आसान है?
किसी भी मनुष्य के लिए सिंहासन छोड़कर वन जाना कठिन है, पर राम के लिए यह केवल कर्तव्य था। राजमहल की रेशमी चादरों की जगह कठोर भूमि, स्वादिष्ट भोजन की जगह जंगली फल-मूल, और शाही सुरक्षा की जगह असुरों से मुठभेड़, यह सिर्फ यात्रा नहीं, यह एक परीक्षा थी।

जब सीता रावण द्वारा हर ली गईं, तब राम का हृदय विदीर्ण हुआ होगा। पर उन्होंने हार नहीं मानी कृ वानरों के साथ गठबंधन किया, समुद्र पर सेतु बनवाया, और लंका के द्वार तक युद्ध का बिगुल बजा दिया। यह केवल पत्नी को लौटाने का नहीं, बल्कि अधर्म को मिटाने का युद्ध था।

युद्ध जीतकर भी राम की आँखों में खुशी नहीं थी, क्योंकि उन्हें अग्नि परीक्षा का कठोर निर्णय लेना पड़ा। वे जानते थे कि सीता निर्मल हैं, पर प्रजा की शंका को शांत करने के लिए उन्होंने अपनी भावनाओं को दबा दिया। कभी-कभी राजधर्म, हृदय से भी भारी हो जाता है। सिंहासन पर बैठने के बाद भी, जब अयोध्या की गलियों में फुसफुसाहटें उठीं, ‘क्या हमारी रानी पवित्र है?’ तो राम ने वही किया, जो उनके लिए सबसे कठिन था। उन्होंने सीता का त्याग कर दिया। एक पति का दिल टूट सकता है, पर राजा का कर्तव्य नहीं टूटना चाहिए, यही उनकी सोच थी।

जीवन के अंत में, जब उन्होंने सरयू के शांत जल में कदम रखा, तो यह केवल विदाई नहीं थी, यह एक संपूर्ण जीवन का अंतिम त्याग था। राम के लिए जीवन कभी स्वयं के लिए नहीं था, वह सदैव दूसरों के लिए था। सचमुच, राम होना दुर्लभ है। राम होने का मतलब है,
वचन को जीवन से बड़ा मानना
भावनाओं पर कर्तव्य को रखना
जीत में विनम्र और हार में धैर्यवान रहना
और जब सब आपके खिलाफ हो जाए, तब भी सही रास्ता चुनना।
दुनिया में राजा बनना आसान हो सकता है, पर राम बनना आज भी उतना ही कठिन है जितना त्रेतायुग में था। क्योंकि राम होना सिर्फ एक नाम नहीं, यह एक आदर्श है, और आदर्श हमेशा कठिन होते हैं।
-लेखक सीनियर सर्जन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष हैं


