





डॉ. अर्चना गोदारा.
मुस्कुराना तो चाहते हैं, लेकिन वजह नहीं मिलती
खुश होना तो चाहते हैं, लेकिन बात नहीं मिलती।
ये है आम जिंदगी की बातें जो हर दिन हर पल लगभग हर व्यक्ति अपने सामने वाले से करता है। क्यों कि हम अक्सर जीवन में अपनी और अपनों की खुशी को किसी बड़े मुकाम, भारी-भरकम सफलता या फिर महंगे तोहफ़ों से जोड़कर देखते हैं। लेकिन जीवन की असली वास्तविकता यह है कि असली खुशी अक्सर उन छोटी-छोटी बातों में छुपी होती है, जिन पर हम रोज़मर्रा की भागदौड़ और प्रतियोगिता पूर्ण जीवन में ध्यान ही नहीं देते।

सुबह-सुबह की ताज़ी और ठंडी हवा में एक गहरी सांस लेना, खिड़की से आती हल्की धूप का स्पर्श, किसी अपने या किसी अजनबी की मुस्कान, ये सब ऐसे क्षण होते हैं जो हमारे मन को हल्का और प्रसन्न कर देते हैं। घर में सुनाई देने वाली बच्चों की खिलखिलाहट, अपने पसंदीदा गाने की मधुर धुन, स्वादिष्ट खाना या बारिश के बाद मिट्टी की खुशबू, ये मामूली-सी लगने वाली छोटी-छोटी बातें भी मन के कोनों में गहरी ताजगी और खुशियां भर देती हैं।

खुशी का असली पैमाना यह कभी नहीं होता है कि हमारे पास कितना धन, प्रसिद्धि या शोहरत है, बल्कि यह है कि हम अपने आसपास की सरल और छोटी-छोटी खुशियों को महसूस कर पाते हैं या नहीं। एक कप गरम चाय के साथ किसी अपने से खुलकर बातें करना, किसी पुरानी किताब में दबा हुआ पत्र पाना, या अचानक मिले पुराने दोस्त को गले लगाना, ये वो अनुभव होते हैं जो दिल और दिमाग में लंबे समय तक गर्माहट और ताजगी को बनाए रखते हैं।

जब ब्यक्ति के पास उत्तम स्वास्थ्य, रोजगार, परिवार, दोस्त और धन हो और फिर भी वह दिल से खुश नहीं है तो यह एक चिंता का विषय है। ऐसी स्थिति में उन सब को अपनी मेहनत से सफलता का आसमान छूने वाले अपंग व्यक्तियों के बारे मे सोचना चाहिए कि जब ये खुश रह सकते हैं तो हम क्यों नहीं। जीवन में खुशी का पैमाना हमेशा भव्यता से नहीं बल्कि संवेदनशीलता से नापा जाना चाहिए और यही संवेदनशीलता हमें छोटी-छोटी बातों में बड़ी खुशी ढूंढना सिखाती है।

जैसे-स्टीफ़न हॉकिंग जो मोटर न्यूरॉन बीमारी के बावजूद ब्रह्मांड के रहस्यों पर अद्वितीय शोध कर दुनिया को नई दिशा दी। हेलेन केलर जो दृष्टिहीन और श्रवणहीन होते हुए भी लेखिका, वक्ता और समाजसेवी बनीं। निक वुजिसिक जो बिना हाथ-पाँव के जन्म लेने के बावजूद लाखों लोगों को प्रेरित करने वाले मोटिवेशनल स्पीकर बने । करोड़ों लोग इन्हें सुनना पसंद करते हैं। सुदा चंद्रन एक अभिनेत्री हैं जो कृत्रिम पैर लगाकर भी मशहूर शास्त्रीय नृत्यांगना बनीं। इसी क्रम में लुई ब्रेल जिन्होंने, दृष्टिहीन होते हुए भी ब्रेल लिपि का आविष्कार कर लाखों नेत्रहीनों के जीवन को आसान बनाया। मारला रनयान भी एक ऐसे उदाहरण है जो दृष्टिहीन होते हुए भी ओलंपिक में भाग लेने वाली एथलीट हैं। भजन लाल शर्मा जो व्हीलचेयर पर रहते हुए भी चित्रकला में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बने। इन सभी हस्तियों की कहानी यह सिखाती है कि सीमाएँ शरीर में नहीं, बल्कि सोच में होती हैं, सकारात्मक सोच से हर असंभव को संभव बनाया जा सकता है।

यदि हम जीवन को सिर्फ बड़े लक्ष्यों की दृष्टि और धन से नहीं, बल्कि इन छोटे-छोटे पलों की रोशनी में देखना सीख जाएं, तो हमें महसूस होगा कि खुशी तो हर दिन हर पल हमारे आस-पास ही बिखरी हुई है। बस ज़रूरत है तो रुककर, मुस्कुराकर, और दिल से उन्हें अपनाने की। खुद में क्षमता और खुशी को ढूँढ़ना इतना कठिन नहीं है जितना समझा जाता है क्यों कि ब्यक्ति खुद को महत्व नहीं दे कर दूसरों से तुलना मे अपना समय व्यतित कर देता है। इसी लिए खुद मे खुद को तलाशे और तराशे। जीवन आपका है इसलिए आपको ही संवारना होगा।
-लेखिका राजकीय एनएमपीजी कॉलेज में सहायक आचार्य हैं


