




भटनेर पोस्ट डेस्क.
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर सब्सिडी घोटाला’ का मामला सामने आया है। हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित नारंग होटल में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, कांग्रेस, राष्ट्रीय तेजवीर सेना और किसान यूथ ब्रिगेड के पदाधिकारियों ने संयुक्त पत्रकार वार्ता कर एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कैसे ‘श्री बालाजी कृषि उद्योग’ नामक कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की सब्सिडी हड़प ली गई। सेंटर की संचालक शीला देवी पत्नी महावीर रिणवाँ द्वारा अगस्त 2018 में यह सेंटर खोला गया था। दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने लगभग डेढ़ दर्जन कृषि यंत्र सब्सिडी पर खरीदे और यह दर्शाया कि 1000 किसानों को किराए पर ये यंत्र उपलब्ध करवाए गए हैं। लेकिन जब सूचना के अधिकार से तथ्य सामने आए, तो पाया गया कि किराए का मात्र एक ही बिल है और वह भी अपनी ही सास के नाम। बाकी 999 बिल कृषि विभाग के पास न हैं और न ही संचालक के पास।
किसान यूथ ब्रिगेड के प्रदेश संयोजक कृष्ण रेवाड़ के अनुसार, कृषि यंत्रों के किराए का कोई सत्यापन नहीं, जीएसटी की कोई जमा राशि नहीं, और दो साल के भीतर ही सभी यंत्र बेच दिए गए। नियमों के अनुसार छह वर्षों तक यंत्रों को बेचना प्रतिबंधित है, और संचालक द्वारा यह शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कर स्पष्ट किया गया था कि यदि शर्तों का उल्लंघन होता है तो विभाग ब्याज सहित राशि वसूल सकता है। लेकिन इसके बावजूद सभी कृषि यंत्र दो वर्षों में बेच दिए गए और सेंटर, जो कागजों में अब तक संचालित दर्शाया जा रहा है, वास्तविकता में सरसों गुणे की गिट्टी फैक्ट्री में तब्दील हो चुका है।

कृषि अधिकारियों की मिलीभगत
पूर्व जिला संयोजक महेन्द्र कड़वा ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा हर छह माह में सेंटर का भौतिक सत्यापन किया जाना था। लेकिन 2018 से अब तक केवल दो बार ही सत्यापन हुआ, वह भी संचालक की अनुपस्थिति में, और हस्ताक्षर फर्जी दर्शाए गए। यह दर्शाता है कि कृषि अधिकारियों की मिलीभगत किस हद तक घोटाले में शामिल है। यह भी खुलासा हुआ कि भौतिक सत्यापन की दो रिपोर्टों में मात्र 5 दिन के अंतर में विरोधाभास है। 18 मार्च 2025 को केंद्र सक्रिय बताया गया और 23 मार्च 2025 को ही बंद! इतनी जल्दी रिपोर्टों में उलटफेर विभाग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
फर्जी बिल, जीएसटी घोटाला और किसानों का नुकसान
कस्टम हायरिंग सेंटर से किसानों को लाभ पहुंचाना था, लेकिन नरेश सिहाग और बलबीर सहारण जैसे किसानों ने बताया कि उन्हें कभी कोई यंत्र किराए पर नहीं मिला। न्यू सग्गू एग्रीकल्चर वर्क्स से यंत्रों की खरीद दर्शाकर 47280 रुपये की जीएसटी राशि बिल में दिखाई गई, लेकिन हकीकत यह है कि यह राशि जीएसटी विभाग में जमा ही नहीं हुई। यानी यह पूरा लेन-देन भी फर्जी था।

राजनीतिक संरक्षण और मौन समर्थन
पत्रकार वार्ता में मौजूद नेताओं ने यह भी कहा कि इस तरह के फर्जीवाड़े में स्थानीय नेताओं की मौन सहमति और राजनीतिक संरक्षण भी शामिल है। किसान कल्याण की योजनाएं जन-जन तक पहुंचे इसके लिए कृषि मेले और प्रदर्शनी में अनुदानित यंत्रों का प्रदर्शन अनिवार्य था, लेकिन ऐसा कभी नहीं किया गया। स्पष्ट है कि योजना सिर्फ कागजों में सीमित रह गई और जमीनी स्तर पर किसानों को शून्य लाभ मिला।
निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग
पदाधिकारियों ने कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की सीबीआई या उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच करवाई जाए। साथ ही, ऐसे सभी सेंटरों का पुनः भौतिक सत्यापन किया जाए, जिन्होंने सब्सिडी ली है। नकली खाद, बीज पर जिस तरह से कार्रवाई की गई, उसी तरह सब्सिडी घोटाले पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।


