





भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
पर्यावरण संरक्षण और परम्पराओं के संगम का सुंदर उदाहरण इस बार गणेश चतुर्थी पर हनुमानगढ़ के श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय में देखने को मिला। जहाँ भगवान श्रीगणेश की स्थापना गोबर से निर्मित प्रतिमा के रूप में की गई। यह पहल न केवल सनातन संस्कृति की जड़ों से जुड़ाव का संदेश देती है, बल्कि आधुनिक समय की सबसे बड़ी चुनौती प्रकृति संरक्षण की ओर भी प्रेरित करती है। प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों से होने वाले जल प्रदूषण के बीच यह जैविक विकल्प समाज के लिए अनुकरणीय है।

गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने इसे परंपरा और प्रकृति दोनों का प्रतीक बताते हुए आमजन से आह्वान किया कि हर कोई ऐसे ही पर्यावरण हितैषी प्रयासों को अपनाकर संस्कृति को सार्थक दिशा दें। मुख्य यजमान गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा सपत्नी, एसकेडी के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश जुनेजा सपत्नी थे।

अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने बताया कि गणेश महोत्सव की शुरुआत आजादी आंदोलन के समय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा प्रथम बार की गई थी उसके बाद से ही महाराष्ट्र सहित पूरे देश भर में भगवान गणेश के प्रति आस्था व उत्साह बढ़ता गया। तब से पूरे देश भर में गणेश चतुर्थी का पर्व व गणेश महोत्सव बड़े ही हर्षाेल्लास से मनाया जाता है।

अबकी बार गोबर से निर्मित भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना एसकेडी परिसर में हुई है, जो स्थानीय ही नहीं बल्कि बाहरी जिलों के लिए भी प्रेरणा दायक बनेगें, क्योंकि गोबर के गणेश जैविक रूप से लाभकारी होते हैं और बैक्टीरिया उत्पन्न करके समुद्री जीवन को सहायता पहुंचाते हैं, वहीं पीओपी की मूर्तियाँ कठोर और चमकदार होती हैं। पीओपी से बने गणेश केमिकल युक्त होते हैं जिससे हानिकारक रसायन के माध्यम से जल प्रदूषण फैला सकते हैं।

सनातन संस्कृति के अनुसार हमें गोबर से निर्मित भगवान गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना करनी चाहिए। बाबूलाल जुनेजा ने आमजन से आग्रह किया है कि गणेश महोत्सव के तहत स्थापित होने वाली भगवन गजानन की गोबर से निर्मित मूर्ति का प्रयोग करें।

जुनेजा ने कृषि उपज मंडी के सचिव विष्णुदत्त शर्मा का भी आभार व्यक्त किया जिनके नेतृत्व में बढे सहज रूप से गोबर से निर्मित भगवन श्री गणेश की मूर्ति आमजन तक पहुँच रही है।

एसकेडीयू के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश जुनेजा ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 10 बजे पूजन एवं सायं 4.15 बजे मंगलाचरण आरती होगी। 11 दिवसीय श्री गणेश महोत्सव का समापन 6 सितंबर को सायं 4.15 बजे भगवान गणेश की मूर्ति को जल प्रवाह कर विसर्जन के साथ होगा।

एसकेडी में भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापना के अवसर पर रिटायर्ड आईजी गिरीश चावला, कुलपति रामावतार मीना, डॉ. रविन्द्र, रविन्द्र सिंह सुमल, आयुर्वेद एंड नेचुरोपैथी विभाग से डॉ. दुर्गा स्वामी, प्रशासक संजीव शर्मा, एसकेडी पीआरओ मनीष कौशिक, अशोक सैनी, सोनिका चौधरी, देवेन्द्र कुमार, विकास किश्नावा, रिंकल, अजय पाल, निर्मल बिश्नोई सहित सभी विभागों के गुरुजन एवं कर्मचारी उपस्थित थे।



