





भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
राजस्थान विधानसभा सत्र के शुरू होने से पहले राज्य की सियासी परिस्थितियां और गरमाती नजर आ रही हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का कांग्रेस ने बहिष्कार कर दिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सत्र को जल्दबाजी में खत्म कर जवाबदेही से बचना चाहती है, जबकि विधानसभा अध्यक्ष चाहते हैं कि सत्र लंबा चले और जनता से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा हो।

कांग्रेस ने हाल ही में वरिष्ठ विधायक नरेन्द्र बुढ़ानिया को विशेषाधिकार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के कुछ ही दिनों बाद अपमानजनक ढंग से हटाए जाने को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ करार दिया। पार्टी ने विधानसभा की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाया और कहा कि जनता के सवालों के जवाब अब पोर्टल पर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे।

इसके अलावा कांग्रेस ने पंचायत व नगरीय निकायों के चुनाव टालने, छात्रसंघ चुनावों में हलफनामों और विपक्षी नेताओं की अनदेखी को भी लोकतंत्र के खिलाफ बताया। शिक्षा और किसान मुद्दों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा गया। स्कूलों की गिरती छतों की मरम्मत के लिए निधि मांगना और बड़े कन्वेंशन सेंटर के निर्माण पर 3500 करोड़ रुपये खर्च करने की आलोचना की गई।

टीकाराम जूली ने याद दिलाया कि 2020 में कांग्रेस सरकार ने विधायकों और सांसदों से एक साथ संवाद किया था, जबकि वर्तमान सरकार केवल अपने विधायकों और हारे हुए प्रत्याशियों की बात सुन रही है। कांग्रेस ने 2 सितंबर को विधायक दल की बैठक कर आगे की रणनीति तय करने की योजना बनाई है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बहिष्कार और विपक्षी हमलों से आगामी विधानसभा सत्र और अधिक संघर्षपूर्ण और विवादास्पद होने की संभावना है।





