



भटनेर पोस्ट डेस्क.
हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित शिव मंदिर सिनेमा के पास स्लम एरिया में एक प्रेरणादायी पहल की शुरुआत हुई, जिसने शिक्षा को किताबों से निकालकर उम्मीदों तक पहुँचा दिया। सशक्त नारी संस्थान की संस्थापक अध्यक्ष एडवोकेट मिताली अग्रवाल के नेतृत्व में यहाँ ‘सशक्त नारी पाठशाला’ का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य सिर्फ़ बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और बेहतर भविष्य के सपनों को मजबूत आधार देना है।

यह पाठशाला 8 फरवरी से प्रत्येक रविवार शाम 5 बजे से 6 बजे तक नियमित रूप से संचालित की जाएगी। आसपास के जरूरतमंद और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए यह एक सुरक्षित, सकारात्मक और उत्साहपूर्ण सीखने का मंच बनेगी, जहाँ वे बिना किसी दबाव के पढ़ाई कर सकेंगे और अपनी क्षमताओं को पहचान पाएँगे।

पाठशाला के पहले दिन का माहौल उत्साह और जिज्ञासा से भरा रहा। बच्चों के चेहरे पर नई चीज़ें सीखने की चमक साफ दिखाई दी। संस्थान की ओर से बच्चों को मुफ़्त पाठ्य सामग्री कॉपी, पेंसिल और पुस्तकें वितरित की गईं। इसके साथ ही छोटी-छोटी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें विजेता बच्चों को मेडल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में बच्चों को हल्का नाश्ता भी उपलब्ध कराया गया, जिससे उनके चेहरे पर मुस्कान और आत्मविश्वास दोनों नजर आए।

इस अवसर पर संस्थान की पूरी टीम सक्रिय रूप से मौजूद रही। कार्यक्रम में संस्थापक एवं अध्यक्ष एडवोकेट मिताली अग्रवाल के साथ संरक्षक भावना मित्तल, सचिव प्रीति गुप्ता, कोषाध्यक्ष सीमा गुप्ता, उपाध्यक्ष निशा मित्तल, प्रचार मंत्री रजनी अग्रवाल तथा सदस्य अनीता गर्ग, श्वेता गोयल, दीपमाला गेरा, सिमरन कौर सहित अन्य सदस्य शामिल हुए। सभी ने बच्चों के साथ समय बिताया, उनसे बातचीत की और उन्हें पढ़ाई के महत्व के बारे में सरल और प्रेरक शब्दों में समझाया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एडवोकेट मिताली अग्रवाल ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य सिर्फ़ पढ़ाना नहीं है, बल्कि इन बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, सपने और उम्मीद जगाना है। जब बच्चे खुद पर विश्वास करना सीखते हैं, तब शिक्षा अपने आप असर दिखाने लगती है।’ उन्होंने कहा कि सशक्त नारी पाठशाला भविष्य में केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जागरूकता पर भी काम करेगी।

संस्थान की संरक्षक भावना मित्तल ने अपने संबोधन में कहा, ‘बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं। उन्हें सही दिशा, सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रेरणा मिलती रहे, यही हमारा प्रयास है।’ उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक तरक्की तभी संभव है, जब अंतिम पंक्ति में खड़े बच्चे तक शिक्षा की रोशनी पहुँचे। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की और इसे स्लम क्षेत्र के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। अभिभावकों का कहना था कि इस तरह की पाठशाला न केवल बच्चों को पढ़ाई से जोड़ेगी, बल्कि उन्हें गलत संगत से दूर रखकर सही दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देगी।

कुल मिलाकर, ‘सशक्त नारी पाठशाला’ की यह शुरुआत एक छोटी पहल जरूर है, लेकिन इसके इरादे बड़े हैं। यह पाठशाला उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी है, जिनके सपने अक्सर संसाधनों की कमी में दब जाते हैं। शिक्षा, संवेदना और समर्पण के साथ शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में समाज के लिए एक मजबूत उदाहरण बन सकती है।




