


गोपाल झा
नूतन वर्ष! प्रकृति के आंगन में जब कोयल की कूक गूंजती है, आम्र मंजरियों की भीनी सुगंध मन को पुलकित करती है और गेहूं की बालियां हवा के साथ लहराती हैं, तब ऐसा लगता है मानो सारा वातावरण एक नए जीवन का स्वागत करने को तैयार हो। खेतों में फसलें मुस्कुरा रही होती हैं, वृक्ष नव पल्लवों से सुसज्जित होकर मानो नई उमंगों से झूम उठते हैं। इस प्राकृतिक उल्लास के बीच भारतीय नव वर्ष का आगमन होता है, जो केवल तिथि परिवर्तन का नहीं, बल्कि एक नए उत्साह, नए संकल्प और नवचेतना का प्रतीक है।
भारतीय संस्कृति में नव वर्ष का आरंभ विक्रम संवत और शक संवत के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। मान्यता है, आज ही के दिवस प्रभु ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। युगों-युगों से इस दिन को नव संवत्सर के रूप में मनाने की परंपरा रही है। राजा विक्रमादित्य ने विक्रम संवत की स्थापना की, जो भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत का प्रतीक है। चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि सृजन का प्रथम दिन माना गया है। इस दिन प्रकृति अपनी नूतन आभा से धरती का श्रृंगार करती है। पेड़ों पर नई कोंपलें, फूलों की सुगंध और पक्षियों की चहचहाहट जीवन में नवीन ऊर्जा का संचार करती है।
इस दिन से नवदुर्गा का पर्व भी आरंभ होता है, जो शक्ति, साहस और सृजन का प्रतीक है। यह दिन मानो पूरे ब्रह्मांड को जागृत कर नए कार्यों के शुभारंभ की प्रेरणा देता है।
भारतीय नव वर्ष केवल एक तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि यह जीवन दर्शन का उत्सव है। यह वह समय है जब व्यक्ति पुरानी गलतियों से सबक लेकर नए संकल्पों की ओर अग्रसर होता है। केवल उल्लास का अवसर नहीं, यह आत्ममंथन और आत्मसाक्षात्कार का समय भी है। इस दिन व्यक्ति अपने पिछले वर्ष का विश्लेषण करता है, अपनी उपलब्धियों और असफलताओं से सीख लेकर नए लक्ष्यों की ओर कदम बढ़ाता है।
यह विविधता भारत की संस्कृति का वह इंद्रधनुष है, जो अलग-अलग रंगों को समेटे हुए एक सुंदर समरसता की तस्वीर पेश करता है। भारतीय नव वर्ष का आगमन तब होता है, जब प्रकृति अपने यौवन पर होती है। पेड़-पौधों पर नवपल्लव खिलते हैं, खेतों में फसलें लहलहाती हैं, और सूरज की किरणें नई आशाओं का संचार करती हैं। यह समय जीवन में सृजन, सौंदर्य और समृद्धि का संदेश लेकर आता है। आज के भागदौड़ भरे जीवन में भारतीय नव वर्ष हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और संस्कृति को आत्मसात करने का अवसर देता है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि जीवन में नवीनता लाना, पुरानी गलतियों से सीखना और नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ना ही जीवन का उद्देश्य है।
नव वर्ष का सूरज हमारे मन में उम्मीदों की नई किरणें जगाता है। यह समय है, नए बीज बोने का, नई सोच उगाने का और नए सपनों को साकार करने का।
तो आइए, इस नव वर्ष में हम अपनी जड़ों को पहचानें, अपने संस्कारों को आत्मसात करें और नवचेतना के प्रकाश में आगे बढ़ें। आप सदैव स्वस्थ, सुखी और सफलता का सोपान तय करते रहें। नूतन वर्ष मंगलमय हो।



