




भटनेर पोस्ट डेस्क.
आज के दौर में सैलून का मतलब अक्सर फेशियल, हेयर कट और क्लीन शेव समझ लिया जाता है, लेकिन हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित लालाजी बालाजी मार्केट की एक छोटी-सी दुकान इस सोच को चुनौती देती है। नाम है ‘क्लीन कट’, मगर हैरानी की बात यह कि करीब दो दशकों में यहां किसी भी ग्राहक का ‘क्लीन शेव’ नहीं किया गया। इस दुकान की पहचान केवल और केवल मूंछों और दाढ़ी की पारंपरिक व आधुनिक स्टाइलिंग से बनी है, और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
चक ज्वालासिंहवाला रोड स्थित विचित्र सिंह कॉलोनी के निवासी हंसराज कालवा ने जब यह काम शुरू किया था, तभी तय कर लिया था कि वे आम रास्ता नहीं अपनाएंगे। उन्होंने कैंची और उस्तरे को केवल मूंछों और दाढ़ी तक सीमित रखा। शुरुआत में लोगों को यह प्रयोग अजीब लगा, लेकिन समय के साथ यही अलग सोच उनकी पहचान बन गई। आज ‘क्लीन कट’ एक दुकान नहीं, बल्कि मूंछों की शान का पता बन चुकी है।

हंसराज कालवा ‘भटनेर पोस्ट डॉट कॉम’ को बताते हैं कि मूंछें केवल स्टाइल का हिस्सा नहीं, बल्कि सम्मान, परंपरा और पहचान का प्रतीक हैं। इसी सोच के साथ वे ग्राहकों की मूंछों को मिट्टी लगाकर पारंपरिक तरीके से बांधते हैं, दाढ़ी को चेहरे के हिसाब से तराशते हैं और हर ग्राहक को अलग पहचान देते हैं। यही वजह है कि यहां आने वाला व्यक्ति सिर्फ हेयर ड्रेसर नहीं, एक कारीगर के पास आने का अनुभव करता है।

दुकान की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब यहां केवल हनुमानगढ़ या आसपास के इलाकों के लोग ही नहीं आते, बल्कि पंजाब और हरियाणा से भी ग्राहक खासतौर पर मूंछें और दाढ़ी सेट करवाने पहुंचते हैं। कई लोग तो केवल मूंछों की मिट्टी लगवाने और उन्हें पारंपरिक अंदाज में बंधवाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करते हैं। उनके लिए यह फैशन नहीं, पहचान का सवाल है।

इस दुकान की चर्चा तब और तेज हो गई जब पंजाबी गानों के मशहूर सिंगर मनकीरत औलख कई बार यहां अपनी मूंछों और दाढ़ी की स्टाइलिंग करवाने पहुंचे। उनके आने के बाद ‘क्लीन कट’ की पहचान सोशल मीडिया और युवा वर्ग में और मजबूत हो गई। अब यह दुकान केवल स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पहचान बन चुकी है।

दूर-दराज से आने वाले ग्राहकों की वजह से दुकान पर लगभग हमेशा भीड़ रहती है। हालात ऐसे बने कि हंसराज को करीब छह महीने पहले टोकन सिस्टम शुरू करना पड़ा। अब ग्राहक टोकन लेकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। कई बार तो 1 से 2 दिन की वेटिंग के बाद ही नंबर आता है। इसके बावजूद लोग धैर्य से इंतजार करते हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा है कि यहां से वही लुक मिलेगा, जो कहीं और नहीं मिल सकता।

हंसराज कालवा का मानना है कि आज जब सब कुछ तेजी से बदल रहा है, तब परंपरा को संभालकर रखना भी एक जिम्मेदारी है। वे कहते हैं कि मूंछें केवल चेहरे की सजावट नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का प्रतीक हैं। शायद यही कारण है कि उनकी दुकान में न तो क्लीन शेव होता है और न ही जल्दबाजी यहां हर मूंछ को समय, सम्मान और सलीके से संवारा जाता है।

पत्रकार राजेश कुमार कहते हैं कि भले इंतजार करना पड़ता है लेकिन मन को संतुष्टि मिलती है। इसलिए यह छोटी-सी दुकान आज यह साबित कर रही है कि भीड़ से अलग रास्ता चुनने वाला ही अपनी अलग पहचान बनाता है। ‘क्लीन कट’ में क्लीन शेव न होना अब कमजोरी नहीं, बल्कि हंसराज कालवा की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।





