



भटनेर पोस्ट डेस्क.
परीक्षा का समय बच्चों और अभिभावकों, दोनों के लिए बेहद संवेदनशील और अहम होता है। यह वह दौर है जब मेहनत, अनुशासन और धैर्य की असली परीक्षा होती है। अक्सर इस समय सारा जोर किताबों, नोट्स और रिवीजन पर होता है, लेकिन एक जरूरी पहलू अनदेखा रह जाता है, बच्चों का खानपान। जबकि सच्चाई यह है कि सही डाइट न केवल शरीर को ऊर्जा देती है, बल्कि दिमाग की एकाग्रता बढ़ाने और तनाव कम करने में भी अहम भूमिका निभाती है। गलत खानपान मेहनत पर पानी फेर सकता है, वहीं संतुलित आहार प्रदर्शन को नई ऊंचाई दे सकता है।

डाइटिशियन अलका अग्रवाल बताती हैं कि बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं और साथ ही कई छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी जुटे हुए हैं। ऐसे में पढ़ाई का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। इस दौरान बच्चों की डाइट अगर सही नहीं होगी तो थकान, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए परीक्षा के समय खाने-पीने पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है।

डाइटिशियन अमिता अग्रवाल के मुताबिक, पढ़ाई के दौरान लगातार घंटों तक बैठना सही नहीं है। बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेना जरूरी है, ताकि दिमाग को आराम मिल सके। इसी के साथ हाई प्रोटीन डाइट को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। प्रोटीन शरीर को ताकत देता है और लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे बच्चे बिना थके पढ़ाई कर पाते हैं।

सुबह की शुरुआत सही हो तो पूरा दिन बेहतर गुजरता है। उन्होंने बताया कि सुबह उठते ही एक गिलास दूध जरूर पीना चाहिए। इसके बाद चने या कोई हल्का नाश्ता लिया जा सकता है। थोड़ी देर बाद फ्रूट्स का सेवन करना फायदेमंद रहता है। इससे शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल मिलते हैं। समय पर भोजन करने की आदत परीक्षा के दिनों में और भी जरूरी हो जाती है, क्योंकि अनियमित खानपान से कमजोरी और आलस्य महसूस हो सकता है।

पढ़ाई के दौरान हेल्दी फूड का सेवन बेहद जरूरी है। डाइटिशियन का कहना है कि सुबह उठकर दूध के साथ बिस्किट या कुछ बादाम खाकर पढ़ाई शुरू की जा सकती है। यह दिमाग को तुरंत ऊर्जा देता है। लगभग 11 बजे के आसपास फल खाना चाहिए, ताकि शरीर को ताजगी मिले। इसके बाद समय के अनुसार संतुलित भोजन करना जरूरी है, जिसमें दाल, सब्जी, रोटी और चावल शामिल हों।

उन्होंने लिक्विड डाइट को प्राथमिकता देने की भी सलाह दी है। पानी, छाछ, जूस और सूप जैसे पेय पदार्थ शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और थकान से बचाते हैं। दोपहर करीब 3 बजे के आसपास चने, मूंगफली या अन्य हाई प्रोटीन चीजों का सेवन करना चाहिए। इससे शाम की पढ़ाई में एनर्जी बनी रहती है और बार-बार भूख लगने की समस्या नहीं होती।

पढ़ाई के बीच-बीच में हल्के-फुल्के और हेल्दी स्नैक्स लेना भी फायदेमंद है। इससे बच्चों को मानसिक राहत मिलती है और पढ़ाई का बोझ कम महसूस होता है। सपना सिंह का कहना है कि बच्चों को तनावमुक्त होकर पढ़ाई करनी चाहिए। अत्यधिक तनाव न केवल सेहत के लिए नुकसानदायक है, बल्कि याददाश्त और समझने की क्षमता को भी प्रभावित करता है।

परीक्षा की तैयारी के दौरान प्रोटीन युक्त डाइट और संतुलित आहार का विशेष महत्व है। इस समय ऑयली चीजों, तले-भुने खाने और फास्ट फूड से दूरी बनानी चाहिए। ये चीजें पचने में भारी होती हैं और सुस्ती, गैस व पेट दर्द जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं, जो पढ़ाई में बाधा बनती हैं। स्वाद के चक्कर में सेहत से समझौता करना इस समय सबसे बड़ी गलती हो सकती है।
कुल मिलाकर, परीक्षा में अच्छे परिणाम केवल घंटों की पढ़ाई से नहीं, बल्कि सही जीवनशैली से भी जुड़े होते हैं। संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद, थोड़ी-सी एक्सरसाइज और सकारात्मक सोच, ये सभी मिलकर बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाते हैं। अगर बच्चे इस दौरान अपने खानपान का ध्यान रखें, तो न सिर्फ उनका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बल्कि परीक्षा में उनका आत्मविश्वास और प्रदर्शन भी निखरकर सामने आएगा।



