



भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
कोहरा भले ही हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर अंचल में छाया हुआ हो, लेकिन राजस्थान की सियासी और प्रशासनिक फिज़ा पूरी तरह साफ हो चुकी है। 2026 में प्रदेश एक ऐसे अभूतपूर्व दौर में प्रवेश करने जा रहा है, जहां चुनाव, बजट और संसद तीनों की धड़कन एक साथ सुनाई देगी। पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव, विधानसभा का बजट सत्र और संसद सत्र एक ही समयावधि में चलेंगे। लोकतंत्र का यह ‘ट्रिपल इंजन’ प्रयोग न केवल प्रशासनिक क्षमता की परीक्षा लेगा, बल्कि राजनीतिक संतुलन और संवैधानिक अनुशासन का भी नया पैमाना तय करेगा।

नए परिसीमन और कानूनी अड़चनों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी कैलेंडर पर अपनी तैयारी पूरी कर ली है। 12 जिला परिषदों को छोड़कर शेष सभी पंचायतों के चुनाव मार्च 2026 में कराए जाएंगे, जबकि हाईकोर्ट के स्टे से मुक्त 196 नगरीय निकायों के चुनाव अप्रैल में प्रस्तावित हैं। राज्य में पहली बार ऐसा संयोग बनेगा जब पंचायत-निकाय चुनाव, विधानसभा का बजट सत्र और संसद सत्र एक ही समयावधि में चलेंगे।

राज्य में कुल 14,699 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 11,283 का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और वहां प्रशासक नियुक्त किए जा चुके हैं। इसके अलावा 3,416 नई ग्राम पंचायतें बनाई गई हैं। वहीं 12 जिला परिषदों का कार्यकाल अभी शेष है, इसलिए उन्हें चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया कि जहां-जहां कानूनी और प्रशासनिक रूप से संभव होगा, वहां एक साथ चुनाव कराए जाएंगे।

नगरीय निकायों की स्थिति थोड़ी जटिल है। प्रदेश में कुल 309 नगरपालिकाएं और नगर निगम हैं, जिनमें से 113 पर हाईकोर्ट का स्टे लगा हुआ है। इन 113 निकायों में बिना क्षेत्र परिवर्तन और बिना जनसंख्या आधार पर वार्ड बढ़ाने को लेकर विवाद है। सरकार ने इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है। यदि स्टे हटता है तो इन निकायों में भी चुनाव संभव होंगे, अन्यथा केवल शेष 196 निकायों में ही अप्रैल में मतदान कराया जाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अहम भूमिका निभा रही है। आयोग को यह रिपोर्ट दिसंबर तक देनी थी, लेकिन अब सरकार ने 31 जनवरी से पहले रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। इसी बीच ओबीसी आयोग का कार्यकाल दूसरी बार बढ़ाया गया है। आयुक्त राजेश्वर सिंह ने मीडिया से कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आना जरूरी है, क्योंकि उसी के आधार पर आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक कराने के निर्देश दिए हैं, इसलिए समयसीमा को देखते हुए आयोग तेजी से काम कर रहा है।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह एक असामान्य स्थिति होगी। 28 जनवरी से विधानसभा का बजट सत्र शुरू होगा, जो संभवतरू मार्च तक चलेगा। वहीं संसद सत्र भी इसी अवधि में चलेगा, जिसकी कार्यवाही 2 अप्रैल तक निर्धारित है। यानी चुनाव, विधानसभा और संसदकृतीनों की गतिविधियां एक साथ चलेंगी। इसे प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने साफ कहा कि सभी पंचायतों और निकायों के चुनाव एक साथ कराना संभव नहीं होगा। जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है और जिन पर कोई कानूनी अड़चन नहीं है, वहां प्राथमिकता के आधार पर चुनाव कराए जाएंगे। जिन 12 जिला परिषदों का कार्यकाल बाकी है और जिन 113 निकायों पर स्टे है, उन्हें फिलहाल बाहर रखा जाएगा।

कुल मिलाकर, राजस्थान 2026 में एक नए चुनावी प्रयोग का गवाह बनने जा रहा है। पंचायतों में मार्च और निकायों में अप्रैल के चुनाव तय माने जा रहे हैं। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और कोर्ट के फैसलों पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि वही अंतिम तारीख और दायरा तय करेंगे। प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह तैयार है, अब गेंद न्यायिक और राजनीतिक पाले में है।



