



भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) राजस्थान शाखा ने राज्य सरकार के समक्ष चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सकों से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं को रखते हुए 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है। आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. एम. पी. शर्मा द्वारा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता मामले मंत्री सुमित गोदारा को भेजे गए पत्र में पूर्व बजट बैठक के दौरान उठाए गए सभी मुद्दों के शीघ्र समाधान का आग्रह किया गया है। आईएमए ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि मेडिकल सोसायटी को स्वास्थ्य उद्योग का दर्जा दिया जाए, जिससे चिकित्सा संस्थानों को औद्योगिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। संगठन का कहना है कि वर्तमान में अस्पतालों को अनेक प्रकार के प्रमाण-पत्र लेने पड़ते हैं, जिससे समय और संसाधनों की अनावश्यक हानि होती है। इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सरकार द्वारा घोषित एकल खिड़की व्यवस्था को तुरंत लागू किया जाना चाहिए।

पत्र में राजस्थान में चिकित्सक संरक्षण कानून लागू करने की भी जोरदार मांग की गई है, ताकि चिकित्सकों के साथ होने वाली हिंसा को गैर-जमानती अपराध घोषित किया जा सके। आईएमए का तर्क है कि गंभीर रोगियों के उपचार के दौरान चिकित्सकों पर हमले का खतरा बना रहता है, जिससे न केवल डॉक्टर बल्कि रोगी का उपचार भी प्रभावित होता है। इस कानून की तत्काल आवश्यकता बताई गई है।
संगठन ने अस्पतालों के बिजली शुल्क को औद्योगिक दर पर लेने, राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत लंबित भुगतानों का शीघ्र निपटारा करने तथा इस योजना में केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना की तर्ज पर दरें लागू करने की मांग की है। साथ ही किसी भी प्रकरण को अस्वीकार करने से पहले उचित स्पष्टीकरण मांगने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया गया है।
आईएमए ने यह भी मांग रखी है कि सूचीबद्ध अस्पतालों द्वारा लिखी गई दवाइयां उसी अस्पताल की अधिकृत औषधि दुकान से ही खरीदी जाएं, क्योंकि अधिकांश फर्जीवाड़े बाहरी दुकानों के माध्यम से होते हैं। इससे रोगियों को गुणवत्ता युक्त दवाइयां मिल सकेंगी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

पत्र में रेजिडेंट चिकित्सकों और सरकारी चिकित्सकों के लिए कार्यस्थल की स्थिति सुधारने तथा आवासीय सुविधाएं बेहतर करने, महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जांच के लिए एचपीवी टीकाकरण और बुजुर्गों में न्यूमोकोकल टीकाकरण को बढ़ावा देने की भी मांग शामिल है।
इसके अलावा आगन जॉब के लिए जनजागरूकता बढ़ाने, डीएनबी सीटों की संख्या बढ़ाने, नए मेडिकल कॉलेजों में शिक्षक पदों की कमी दूर करने, पुरानी गली-मोहल्लों में स्थित अस्पतालों को नए नियमों के तहत राहत देने, तथा मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के पैकेज पर पुनर्विचार कर बढ़ोतरी करने का भी आग्रह किया गया है। आईएमए ने राज्य सरकार से अपेक्षा जताई है कि इन सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लिए जाएंगे, ताकि प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता सुधरे और चिकित्सकों को सुरक्षित व सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सके।



