



भटनेर पोस्ट डेस्क.
कड़ाके की ठंड, आधी रात और सुनसान सड़कें। हनुमानगढ़ में जब शहर गहरी नींद में था, तब जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव शहर की धड़कन टटोलने निकल पड़े। मकसद साफ था, ठंड की इस सितम भरी रात में कोई बेसहारा खुले आसमान के नीचे न रहे, कोई भूखा न सोए। यह कोई औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि एक इंसानी फर्ज़ निभाने की कोशिश थी। रात करीब 11.35 बजे कलक्टर ने चालक को जगाया, गाड़ी में बैठे और सीधे शहर के रैन बसेरों की ओर निकल पड़े। सूचना मिलते ही नगर परिषद आयुक्त सुरेंद्र यादव भी मौके पर पहुंचे। सबसे पहले जंक्शन बस स्टैंड स्थित रैन बसेरे का निरीक्षण किया गया। अंदर दाखिल होते ही कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने वहां ठहरे लोगों से आमने-सामने बात की। बिस्तर कैसा है, रजाई पर्याप्त है या नहीं, ठंड से बचाव के इंतजाम ठीक हैं या नहीं। बातचीत में अपनापन था, लहजा नरमी भरा और निगाहें हर जरूरत पर टिकती हुई।

कलक्टर ने मौके पर ही निर्देश दिए कि अतिरिक्त चारपाइयों की व्यवस्था तुरंत की जाए, ताकि किसी को जगह के अभाव में लौटना न पड़े। उन्होंने कहा कि ठंड में सबसे जरूरी है गरमी और इत्मीनान, दोनों में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। आयुक्त सुरेंद्र यादव को साफ हिदायत दी गई कि व्यवस्थाएं और सुदृढ़, और व्यवस्थित रहें।

इसके बाद काफिला मुख्य बाजार की ओर बढ़ा। डिवाइडर पर, दुकानों के आगे बैठे लोगों से कलक्टर खुद मिले। किसी से नाम पूछा, किसी से हालचाल, किसी को समझाइश दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से रैन बसेरों में निःशुल्क आश्रय, रजाई-बिस्तर की व्यवस्था है, ताकि कोई भी शख्स ठंड की मार से महफूज़ रह सके। यह केवल सूचना नहीं थी, बल्कि भरोसा दिलाने की कोशिश थी कि सरकार आपके साथ है।

कलक्टर डॉ. यादव ने यह भी बताया कि रैन बसेरों में ठहरे लोगों को अन्नपूर्णा रसोई के माध्यम से मात्र आठ रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। ‘कोई भूखा न सोए’ यह बात उन्होंने बार-बार दोहराई। उनकी इस सोच में प्रशासनिक जिम्मेदारी से ज्यादा इंसानियत की खुशबू थी। कई लोग जो झिझक में बाहर बैठे थे, उन्हें खुद चलकर रैन बसेरे तक जाने को कहा गया। कुछ ने हामी भरी, कुछ को समझाया गया, हर कदम पर नरमी और तहजीब।

सामाजिक कार्यकर्ता मनोज बड़सीवाल कहते हैं, ‘जब आम लोग कंबल में दुबककर बिस्तर नहीं छोड़ना चाहते, तब शहर का जिला कलक्टर ठंडी हवाओं में सड़कों पर था। यह केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत को देखने और महसूस करने की कोशिश थी।’ रैन बसेरे में ठहरे एक बुजुर्ग ने कहा, ‘साहब खुद आए हैं, हाल पूछा है, अब दिल को सुकून है।’ यह सुकून शायद किसी फाइल से नहीं, बल्कि उस मुलाकात से आया था। नगर परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि साफ-सफाई, रोशनी, पानी और गरमी के इंतजाम में कोई ढिलाई न हो। कलक्टर ने यह भी कहा कि जरूरत पड़े तो रात में भी स्टाफ सक्रिय रहे, ताकि किसी भी समय मदद मिल सके।




