



भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर बुधवार, 17 दिसंबर की सुबह कुछ अलग ही तस्वीर लेकर आई। आम दिनों की तरह बाजारों की चहल-पहल नहीं, बल्कि अनाज मंडी के चारों ओर सख्त पहरा, सड़कों पर भारी पुलिस बल और हर मोड़ पर बैरिकेडिंग नजर आई। ऐसा लग रहा था मानो पूरा इलाका किसी बड़े इम्तिहान के लिए तैयार हो। वजह साफ थी, टिब्बी के राठीखेड़ा में एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में जंक्शन स्थित धान मंडी में बुलाई गई किसान महापंचायत।
प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं था। जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव और पुलिस अधीक्षक हरिशंकर खुद हर स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। बीकानेर संभाग से अतिरिक्त पुलिस कंपनियां मंगाई गईं। दर्जनों आरएएस और आरपीएस अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। अनाज मंडी के सभी गेटों पर अवरोधक लगाए गए, मुख्य गेट को छोड़कर बाकी गेट बंद कर दिए गए और उनके आगे ट्रक और ट्रॉलियां खड़ी कर दी गईं। कलेक्ट्रेट से करीब आधा किलोमीटर पहले ही रास्ता बंद कर दिया गया, ताकि कोई अप्रिय स्थिति पैदा न हो।
समाचार लिखे जाने तक धान मंडी में किसान महापंचायत जारी थी। बड़ी संख्या में किसान सुबह से ही मंडी पहुंचने लगे थे। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी थी, लेकिन प्रशासन ने किसानों को धान मंडी में आने की अनुमति दी। पूरे क्षेत्र में लगातार पुलिस गश्त चलती रही और इलाका पूरी तरह पुलिस छावनी में तब्दील नजर आया।
महापंचायत में देश के प्रमुख किसान नेता राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी और जोगेंद्र सिंह उगराहा की मौजूदगी ने आंदोलन को और धार दे दी। इनके अलावा विधायक अभिमन्यु पूनिया, पूर्व विधायक बलवान पूनिया, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर, मंगेज चौधरी, रेशम सिंह, शबनम गोदारा, सोहन ढील, रामेश्वर वर्मा और रघुवीर वर्मा भी महापंचायत में शरीक हुए। नेताओं ने एक सुर में भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह विकास के नाम पर आम आदमी की जमीन, हवा और पानी छीनने पर आमादा है।
किसान नेता जोगेंद्र सिंह उगराहा ने मंच से साफ शब्दों में कहा कि आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक राठीखेड़ा में बन रही एथेनॉल फैक्ट्री हटाई नहीं जाती। उन्होंने कहा कि पहले सरकार शिक्षा और रोजगार पर चोट कर रही थी, अब जमीन, पानी और हवा तक खतरे में डाल दी गई है। एथेनॉल जैसी फैक्ट्रियों से अगर पर्यावरण दूषित हुआ तो आम आदमी के पास जाने के लिए जगह ही नहीं बचेगी। उनके इस बयान पर किसानों ने जोरदार तालियों और नारों के साथ समर्थन जताया।
यह महापंचायत टिब्बी के राठीखेड़ा गांव में बन रही एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में बुलाई गई है। किसानों की मुख्य मांग है कि इस फैक्ट्री के लिए किया गया एमओयू तत्काल रद्द किया जाए। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और टिब्बी में हुए टकराव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई जा रही है। किसान नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक फैक्ट्री की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।
पूरा विवाद चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड ड्यून इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से जुड़ा है, जो राठीखेड़ा में 40 मेगावाट का अनाज आधारित एथेनॉल प्लांट लगा रही है। कंपनी का दावा है कि यह प्लांट केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम को समर्थन देगा। हालांकि, किसानों का कहना है कि इससे इलाके के भूजल, खेती और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ेगा।
इस प्लांट के खिलाफ सितंबर 2024 से जून 2025 तक करीब 10 महीने शांतिपूर्ण विरोध चला। जुलाई 2025 में कंपनी द्वारा चारदीवारी निर्माण शुरू किए जाने के बाद विरोध ने उग्र रूप ले लिया। 19 नवंबर 2025 को पुलिस सुरक्षा में फैक्ट्री निर्माण दोबारा शुरू हुआ, जिससे किसानों में भारी नाराजगी फैल गई। इसी दौरान किसान नेता महंगा सिंह समेत 12 से अधिक नेताओं को गिरफ्तार किया गया। 20 और 21 नवंबर को 67 किसानों ने स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी।
10 दिसंबर को टिब्बी एसडीएम कार्यालय के सामने किसानों ने बड़ी सभा की। शाम करीब चार बजे सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों के साथ फैक्ट्री साइट पर पहुंच गए। गुस्से में किसानों ने फैक्ट्री की दीवार ट्रैक्टर से तोड़ दी, जिसके बाद पुलिस और किसानों के बीच झड़प हो गई। इस घटना के बाद से माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया।
इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए प्रशासन इस बार पूरी तरह सतर्क नजर आया। किसान महापंचायत शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है, लेकिन संदेश साफ है, किसान अब पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। यह आंदोलन सिर्फ हनुमानगढ़ तक सीमित नहीं, बल्कि प्रदेश और देश की राजनीति में भी हलचल पैदा करने की ताकत रखता है।



