



भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी एथनॉल प्लांट को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के मामले में कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने इस पूरे विवाद के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर होती तो जिला प्रभारी मंत्री कम से कम एक बार किसानों से संवाद करने ज़रूर आते। सरकार की उदासीनता और हठधर्मिता का ही नतीजा है कि टिब्बी क्षेत्र का किसान पिछले डेढ़ वर्ष से धरने पर बैठा है। हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक पूनिया ने कहा कि किसानों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन जब उन्होंने सरकार से सवाल पूछे तो जवाब में उन पर लाठियां बरसाई गईं। किसानों और आंदोलनकारियों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए तथा निर्दाेष लोगों की गिरफ्तारियां की गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित नहीं, बल्कि तानाशाही सोच को दर्शाता है।

विधायक पूनिया ने कहा कि टिब्बी क्षेत्र में एथनॉल प्लांट के विरोध में आंदोलन कोई अचानक शुरू नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से किसान अपनी ज़मीन, पर्यावरण और भविष्य को लेकर आशंकित हैं। बावजूद इसके सरकार ने उनकी बात सुनने की बजाय दमन का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सरकार संवाद करती, तो हालात इतने बिगड़ते ही नहीं।

कांग्रेस की भूमिका पर बात करते हुए पूनिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा किसानों, मजदूरों, युवाओं और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा की है। इसके विपरीत वर्तमान बीजेपी सरकार इन वर्गों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि कांग्रेस इस किसान आंदोलन का खुलकर समर्थन कर रही है और 17 दिसंबर को प्रस्तावित महापंचायत में कांग्रेस के अधिक से अधिक कार्यकर्ता और नेता भाग लेंगे।

बीजेपी सरकार द्वारा यह कहे जाने पर कि एथनॉल प्लांट का एमओयू कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ था, इस पर भी विधायक पूनिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि एमओयू गलत है या जनहित में नहीं है, तो उसे निरस्त क्यों नहीं किया जाता। पूनिया ने सवाल उठाया कि जब बीजेपी सरकार जनहितैषी योजनाओं को बिना झिझक बंद कर सकती है, कांग्रेस सरकार की योजनाओं के नाम बदल सकती है, तो फिर इस एमओयू को रद्द करने में क्या परेशानी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जहां आम जनता को सीधा लाभ मिल रहा है, वहां योजनाएं बंद की जा रही हैं और जहां जनता को नुकसान होने की आशंका है, वहां सरकार बहानेबाजी कर रही है। यह किस तरह की राजनीति है, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए। विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि जब एमओयू हुआ था, उस समय प्लांट की जगह और अन्य तकनीकी पहलुओं को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। बाद में जब ज़मीनी हकीकत सामने आई, तब किसानों की चिंताएं और विरोध स्वाभाविक हो गया।

इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर ने भी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि टिब्बी का किसान अपनी जायज़ मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है और कांग्रेस उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार को टकराव का रास्ता छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। प्रेस वार्ता में पूर्व प्रधान जयदेव भिड़ासरा, सोहन ढिल, हरप्रीत ढिल्लो, कृष्ण नेहरा सहित कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार से किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और टिब्बी एथनॉल प्लांट विवाद का स्थायी समाधान निकालने की मांग की।


