



भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय, हनुमानगढ़ ने शिक्षा को सिर्फ डिग्री तक सीमित रखने के बजाय उसे जीवन जीने की कला से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने वैश्विक स्तर पर प्रख्यात संस्था आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के साथ एक महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार जुनेजा की उपस्थिति एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जी के सान्निध्य में संपन्न हुआ।
इस एमओयू के माध्यम से विश्वविद्यालय में शिक्षा और जीवन कौशल, दोनों का एक नया और उच्च स्तर स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों के सर्वांगीण विकास के लिए वेलनेस, तनाव-प्रबंधन और व्यक्तित्व विकास पर आधारित विभिन्न कार्यक्रमों का संयुक्त रूप से संचालन करना है। साधारण भाषा में कहें तो यह साझेदारी किताब और जीवन, दोनों की पढ़ाई एक साथ करवाने की तैयारी है।

प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार जुनेजा ने बताया कि इस एमओयू के तहत आर्ट ऑफ लिविंग विश्वविद्यालय परिसर में कई संरचित और नियमित गतिविधियाँ आयोजित करेगा। इनमें ध्यान सत्र, हैप्पीनेस प्रोग्राम, भावनात्मक संतुलन व तनाव-प्रबंधन कार्यशालाएँ, लीडरशिप एवं व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षण, तथा आध्यात्मिक एवं मानसिक स्वास्थ्य उन्नयन गतिविधियाँ शामिल होंगी। उनका कहना है कि इन कार्यक्रमों का मूल मकसद विद्यार्थियों को जीवन जीने की सही कला सिखाना, उनके कौशल (स्किल) को बढ़ाना, उन्हें तनावमुक्त रखते हुए पढ़ाई और स्वयं के लिए संतुलित समय देने की आदत विकसित करना है।
इन गतिविधियों के ज़रिए छात्रों में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और मानसिक दृढ़ता को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में जहाँ युवा वर्ग पढ़ाई, करियर और निजी जीवन के दबावों के बीच फँसा रहता है, वहाँ इस तरह के कार्यक्रम मानसिक संतुलन और भावनात्मक मजबूती के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

एमओयू के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने आर्ट ऑफ लिविंग की टीम का स्वागत किया और इसे विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और जीवन कौशल को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। प्रशासन का मानना है कि यह सहयोग विद्यार्थियों के अकादमिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत व सामाजिक जीवन को भी समृद्ध करेगा। यानी वे सिर्फ अच्छे छात्र नहीं, बल्कि संतुलित और जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज में योगदान दे सकेंगे।

विश्वविद्यालय ने इस समझौते को लंबी अवधि की साझेदारी बताते हुए भविष्य में भी विभिन्न उन्नयन कार्यक्रमों को लागू करने की अपनी योजनाएँ साझा कीं। प्रबंधन का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि यह पार्टनरशिप किसी एक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में लगातार कई नई पहलें, प्रशिक्षण और सत्र इसके तहत चलाए जाएँगे।

एमओयू के अनुसार विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए भी एक विशेष कार्यक्रम तय किया गया है। इसके तहत 3 दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित होगा, जिसमें शिक्षकों की बौद्धिक क्षमता, कक्षा प्रबंधन, संवाद कौशल और विद्यार्थियों के साथ संवेदनशील व्यवहार जैसे आयामों पर काम किया जाएगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि यदि शिक्षक संतुलित, प्रेरित और मानसिक रूप से मजबूत होंगे, तो उसकी सीधी सकारात्मक छाप विद्यार्थियों पर पड़ेगी।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जी, डायरेक्टर सोशल प्रोजेक्ट एंड सीएसआर फंड कैप्टेन विमल जैन, तथा श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के जॉइंट रजिस्ट्रार विभूति नारायण की उपस्थिति ने इस साझेदारी को और भी सार्थक और औपचारिक रूप दिया। सभी ने संयुक्त रूप से इस एमओयू को शिक्षा क्षेत्र में समय की माँग के अनुरूप एक प्रगतिशील कदम बताया।

कुल मिलाकर, श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय और आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के बीच हुआ यह समझौता सिर्फ दस्तावेज़ पर दर्ज कुछ पंक्तियाँ नहीं, बल्कि एक ऐसे विज़न की शुरुआत है जिसमें विश्वविद्यालय की परिभाषा सिर्फ ‘पढ़ाई कराने वाली जगह’ तक सीमित नहीं, बल्कि ‘जीवन गढ़ने वाली संस्था’ के रूप में सामने आती है। हनुमानगढ़ की धरती पर यह पहल आने वाले समय में कई युवाओं की सोच, स्वभाव और जीवन पथ पर सकारात्मक असर छोड़ने की क्षमता रखती है।प्


