


भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
राजस्थान का सीमावर्ती जिला हनुमानगढ़ इन दिनों देश की सुरक्षा एजेंसियों की नजर में है। वजह है, यहां से गुजरात तक आतंकियों को हथियार सप्लाई किए जाने का सनसनीखेज खुलासा। गुजरात एटीएस की कार्रवाई में गिरफ्तार तीन आतंकियों से पूछताछ के बाद यह मामला सामने आया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। अब राजस्थान एटीएस की विशेष टीम अहमदाबाद पहुंच चुकी है और गुजरात एटीएस के साथ मिलकर पूरे नेटवर्क की परतें उधेड़ने में जुटी है।

तीन दिन पहले गुजरात एटीएस ने अहमद मोहियुद्दीन सैयद, सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहैल नामक तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि आतंकी गतिविधियों के लिए जरूरी हथियार राजस्थान के हनुमानगढ़ इलाके से सप्लाई किए गए थे। यह खुलासा जितना चौंकाने वाला है, उतना ही चिंताजनक भी।

सूत्रों के अनुसार, हथियारों की सप्लाई का रास्ता भारतमाला एक्सप्रेस वे से होकर गुजरा, जो अमृतसर से हनुमानगढ़ होते हुए गुजरात तक जाता है। यह लंबा हाईवे कई हिस्सों में सुनसान और पुलिस थानों से दूर है। यही वजह रही कि तस्करों और आतंकियों ने इस मार्ग को अपने लिए ‘सेफ कॉरिडोर’ के रूप में इस्तेमाल किया।

राजस्थान एटीएस ने गुजरात एटीएस से पूछताछ रिपोर्ट मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। टीम हनुमानगढ़ जिले के कई इलाकों में छापेमारी कर रही है और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर संभावित सप्लायरों की पहचान में जुटी है। एटीएस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति की संलिप्तता से कहीं बड़ा हो सकता है। इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या यह नेटवर्क पंजाब या हरियाणा तक फैला हुआ है।

हनुमानगढ़ के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की उच्च स्तरीय जांच की जा रही है। एटीएस और जिला पुलिस दोनों अपने-अपने स्तर पर गहन जांच में जुटे हैं। फिलहाल इस मसले पर ज्यादा कुछ कहना उचित नहीं होगा। एडवोकेट देवकीनंदन चौधरी ने कहा, ‘यह केवल पुलिस का मामला नहीं है, बल्कि समाज की जिम्मेदारी भी है कि वह चौकन्ना रहे। आतंकवादी नेटवर्क अक्सर स्थानीय लोगों की अनजान मदद से पनपते हैं। ऐसे में हर नागरिक को अपने आसपास की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में हथियार और नशे की तस्करी पहले से एक चुनौती रही है। अब अगर आतंकियों ने इस रूट को सक्रिय रूप से इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या हथियारों की सप्लाई में किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका रही या यह पूरा खेल स्थानीय आपराधिक गिरोहों के जरिए संचालित हुआ। हनुमानगढ़ की भौगोलिक स्थिति इसे संवेदनशील बनाती है। पंजाब की सीमा से सटा यह इलाका कई राज्यों से जुड़ता है, जिससे अवैध गतिविधियों के लिए यह एक सुविधाजनक मार्ग बन जाता है।

एटीएस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में कुछ नाम सामने आए हैं, जिन पर गहन निगरानी रखी जा रही है। हथियार कहां से लाए गए, किस माध्यम से सप्लाई किए गए और बदले में किसे क्या रकम मिली, इन सभी पहलुओं पर जांच केंद्रित है। मामले के उजागर होते ही राज्य सरकार ने भी उच्चस्तरीय रिपोर्ट तलब की है। गृह विभाग ने एटीएस से कहा है कि वह जांच की पूरी प्रगति पर दैनिक रिपोर्ट दे। साथ ही, सीमावर्ती जिलों में पुलिस गश्त बढ़ाने और संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

हनुमानगढ़ का नाम पहले शायद कृषि और सीमांत संस्कृति के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह जिला एक ऐसे खुलासे की वजह से चर्चा में है जो पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। गुजरात में पकड़े गए आतंकियों से जुड़े इस नेटवर्क की तह तक पहुँचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्राथमिकता बन चुका है। फिलहाल एटीएस की टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं, लेकिन असली चुनौती यह है कि हनुमानगढ़ के भीतर छिपे उन चेहरों की पहचान की जाए जो आतंकियों के लिए हथियार सप्लाई चेन का हिस्सा बने।



