





डॉ. अर्चना गोदारा
शिक्षा हर मनुष्य का मूलभूत अधिकार है, लेकिन दुर्भाग्य से समाज ने मनुष्य को दो हिस्सों, पुरुष और महिला में बाँट दिया है। जहाँ पुरुषों के लिए शिक्षा प्राप्त करना सहज है, वहीं महिलाओं के लिए यह आज भी चुनौती बना हुआ है। भारत में आज भी कई महिलाएँ सामाजिक, पारिवारिक या आर्थिक कारणों से नियमित शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। अनेक परिवार अब भी यह सोच रखते हैं कि लड़कियों की शिक्षा पर खर्च व्यर्थ है, क्योंकि वे शादी के बाद ‘दूसरे घर’ चली जाएँगी। यही सोच महिलाओं के सपनों और आत्मनिर्भरता की राह में सबसे बड़ी बाधा रही है।

ऐसे में दूरस्थ शिक्षा छात्रवृत्ति योजनाएँ महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। ये योजनाएँ उन्हें घर बैठे उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देती हैं, वह भी बिना आर्थिक बोझ के। योजना के तहत महिला विद्यार्थी पहले अपनी कोर्स फीस जमा करती हैं, और फिर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करती हैं। निर्धारित समय के बाद वही राशि उनके खाते में वापस कर दी जाती है। इस तरह सरकार उन्हें वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय और इग्नू जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध करा रही है।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी आय सीमा का बंधन नहीं है। विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यक अध्ययन सामग्री भी विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाई जाती है, जिससे वे अपने घर पर रहकर सहजता से अध्ययन कर सकती हैं।

डिस्टेंस एजुकेशन ने उन महिलाओं के लिए नई राह खोली है जो विवाह, मातृत्व या पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण नियमित कॉलेज नहीं जा पातीं। यह व्यवस्था उन महिलाओं के लिए भी उम्मीद की किरण है जिनके पास पढ़ाई के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। घर और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी वे अब अपनी शिक्षा जारी रख सकती हैं। छात्रवृत्ति योजना उनके आर्थिक बोझ को हल्का करती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करती है।

शिक्षा केवल ज्ञान नहीं देती, यह आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और जीवन को दिशा देने की समझ भी देती है। छात्रवृत्ति के सहयोग से महिलाएँ उच्च शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर ट्रेनिंग, कौशल विकास या व्यावसायिक कोर्स भी कर सकती हैं। इससे उनके रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और वे समाज में सशक्त स्थान बना पाती हैं।

गाँवों और पिछड़े इलाकों की महिलाओं के लिए यह योजना किसी नई सुबह की तरह है। जहाँ कॉलेजों की पहुँच सीमित है, वहाँ ऑनलाइन शिक्षा और सरकारी छात्रवृत्तियाँ जीवन बदलने का माध्यम बन रही हैं। इग्नू छात्रवृत्ति योजना, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल और यूजीसी की ओपन लर्निंग स्कीमें विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन देने पर केंद्रित हैं।

इन योजनाओं का मूल उद्देश्य है, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें शिक्षा से जोड़ना। सरकार की ये पहल वास्तव में महिलाओं के लिए किसी जादुई छड़ी से कम नहीं, जिससे वे अपनी इच्छाशक्ति के बल पर किसी भी स्तर की शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं। अब उन्हें पैसों की कमी या सामाजिक बंदिशों के कारण अपने सपनों का गला घोंटने की जरूरत नहीं है।

किसी भी राष्ट्र के विकास का आधार उसकी साक्षरता है। जब तक पुरुष और महिला दोनों समान रूप से शिक्षित नहीं होंगे, तब तक समाज का संतुलित विकास संभव नहीं। ऐसे में सरकार की ये योजनाएँ केवल शिक्षा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की सीढ़ी हैं। ये महिलाओं को न केवल सशक्त बना रही हैं, बल्कि उनके शोषण के विरुद्ध ढाल बनकर खड़ी हैं।
-सहायक आचार्य, राजकीय नेहरू मेमोरियल महाविद्यालय, हनुमानगढ़




