





भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
राजस्थान में एसआई भर्ती परीक्षा-2021 में आयु सीमा में छूट को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने सरकार के परीक्षा प्रबंधन और निर्णय क्षमता पर तीखी टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की बेंच ने मामले में आदेश सुनाते हुए कहा कि सरकार प्रभावशाली जातीय लॉबी के राजनीतिक दबाव में फैसले नहीं ले पा रही है, जिसका सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। कोर्ट ने सरकार को आठ सप्ताह के भीतर आयु सीमा में छूट पर पुनर्विचार कर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखे। जस्टिस जैन ने कहा कि एसआई भर्ती परीक्षा की साख पर प्रश्नचिह्न लग चुका है और सरकार को इसे बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने टिप्पणी की कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि परीक्षा व्यवस्था जातीय और राजनीतिक दबावों की भेंट चढ़ती जा रही है, जिससे योग्य और परिश्रमी युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया है।

कोर्ट ने इस दौरान पेपर लीक प्रकरण में आरपीएससी के तत्कालीन सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। आदेश में कहा गया कि आयोग के कुछ सदस्यों की मिलीभगत के चलते परीक्षा की विश्वसनीयता डगमगा गई और पूरे सिस्टम पर अविश्वास का संकट खड़ा हो गया। कोर्ट ने कहा कि सरकार को ऐसे तंत्र के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना चाहिए, ताकि भविष्य में परीक्षाओं की पारदर्शिता पर कोई संदेह न रहे।

न्यायमूर्ति जैन ने कहा कि सरकार की ओर से गठित उपसमिति ने स्वयं आयु सीमा में छूट की सिफारिश की थी, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। यह युवाओं के साथ अन्याय है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकार विभिन्न जातीय और राजनीतिक समूहों के दबाव में नीतिगत फैसले लेने से हिचकिचा रही है, जिससे नीति निर्माण और प्रशासनिक निष्पक्षता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कई अभ्यर्थी अब आयु सीमा पार कर चुके हैं और उनके पास अदालत की शरण में आने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के तहत उन्हें समान अवसर और निष्पक्ष प्रतियोगिता का अधिकार प्राप्त है। यदि सरकार इन अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहती है, तो न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ेगा।
कोर्ट ने अपने आदेश में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत में हो रहे भर्ती घोटालों पर छपी रिपोर्टों और युवाओं के भविष्य को लेकर उठ रही चिंताओं का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि ऐसी खबरें देश की साख को प्रभावित करती हैं। सरकार को चाहिए कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करे, ताकि युवाओं का विश्वास और देश की विश्वसनीयता दोनों कायम रह सकें।





