

भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
मिथिलांचल की संस्कृति में ‘पाग’ का वही स्थान है, जो राजस्थान में साफा या पंजाब-हरियाणा में पगड़ी का होता है, यानी सम्मान, प्रतिष्ठा और अस्मिता का प्रतीक। कहा जाता है कि जब श्रीराम विवाह के लिए मिथिलांचल पहुंचे तो उन्हें भी पाग पहनाया गया था। पाग पहनना गर्व का विषय है और उतारना या फेंक देना सामाजिक अपमान माना जाता है। लेकिन इस बार चुनावी रैलियों में यही पाग विवाद का कारण बन गया है। दरभंगा की अलीनगर विधानसभा से जुड़े दो वायरल वीडियो ने सियासी हलकों में खलबली मचा दी है।

पहला वीडियो बीजेपी प्रत्याशी लोकगायिका मैथिली ठाकुर से जुड़ा है। मैथिली अपने मधुर स्वर और पारंपरिक गीतों से देशभर में पहचान बना चुकी हैं। बीजेपी ने उनकी लोकप्रियता को भुनाने की रणनीति के तहत उन्हें मैदान में उतारा है। लेकिन हाल में वायरल एक वीडियो में वे मिथिलांचल की अस्मिता से जुड़ी पाग में मखाना रखकर खाते हुए नजर आ रही हैं। यह दृश्य सोशल मीडिया पर फैलते ही लोगों में नाराजगी फैल गई। लोगों का कहना है कि पाग में कुछ भी रखना या उससे खाने का काम करना, मिथिला की परंपराओं में अपमानजनक माना जाता है।

हालांकि कई लोगों ने मैथिली ठाकुर की गलती को उनकी नासमझी बताकर माफ करने की बात भी कही है। उनका कहना है कि मैथिली भले ही मिथिलांचल की बेटी हों, लेकिन उनका रहन-सहन और संस्कार अब बिहार से दूर दिल्ली के महानगरीय माहौल में ढल चुके हैं। इसलिए इस घटना को अनजाने में हुई भूल के रूप में देखा जा सकता है।

लेकिन मामला यहीं नहीं थमा। दूसरा वीडियो बीजेपी विधायक केतकी सिंह से जुड़ा है, जिसने आग में घी डालने का काम किया। केतकी सिंह, मैथिली ठाकुर की रैली को संबोधित करने अलीनगर पहुंची थीं। कार्यक्रम में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उन्हें पारंपरिक तरीके से पाग पहनाकर सम्मानित किया। परंतु केतकी सिंह ने पाग को हाथ में लेते हुए कहा, ‘पाग नहीं, मिथिला की असली इज्जत तो मैथिली ठाकुर हैं।’ इतना कहकर उन्होंने पाग को टेबल पर पटक दिया।

इस घटना के बाद मिथिलांचल के लोगों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। सोशल मीडिया से लेकर गांव-गांव तक यह चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और सांस्कृतिक संगठनों ने बीजेपी नेताओं की अज्ञानता और असंवेदनशीलता पर सवाल उठाए हैं। मिथिला सांस्कृतिक परिषद्, दरभंगा के सदस्य डॉ. सुधीर मिश्र ने कहा, ‘पाग हमारी पहचान है। किसी भी व्यक्ति को इसका अपमान करने का अधिकार नहीं। जो नेता हमारी संस्कृति नहीं समझते, वे हमारे क्षेत्र का नेतृत्व कैसे करेंगे?’
लोगों में ‘पाग का अपमान’ इस तरह असहनीय हो रहा है कि वे सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। सुनील कुमार झा लिखते हैं, ‘हमारे पाग को अपमानित करने वाले चाहे किसी दल का हो, मैं उस पर थूकता हूं।’

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकता है। मिथिलांचल में पाग केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का प्रतीक है। पाग का अपमान भावनाओं को गहराई से आहत करता है, और यह मुद्दा अब बीजेपी के लिए सांस्कृतिक असंवेदनशीलता का प्रतीक बन सकता है।

वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस प्रकरण को हवा दे दी है। राजद और कांग्रेस नेताओं ने इसे ‘मिथिला की परंपराओं का अपमान’ बताते हुए बीजेपी पर संस्कृति की राजनीति करने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर ‘सेवमिथिलापाग’ ट्रेंड कर रहा है।
बीजेपी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन पार्टी के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने दोनों घटनाओं को ‘अनजाने में हुई भूल’ बताते हुए विवाद को शांत करने की कोशिश की है। फिर भी, मिथिला की धरती पर ‘पाग’ को लेकर छिड़ी यह बहस अब एक भावनात्मक आंदोलन का रूप ले चुकी है। चुनावी शोर-शराबे के बीच यह सवाल गूंज रहा है, जो पार्टी खुद को ‘संस्कृति की रक्षक’ कहती है, वही अगर अस्मिता का अपमान करे तो जनता किस पर भरोसा करे?




