





भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
वृंदावन की पावन धरती से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने न केवल हिंदू-मुस्लिम संबंधों में नई रोशनी भरी है, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। राधा-कृष्ण के अनन्य भक्त और देशभर में अपने सत्संगों से शांति और प्रेम का संदेश देने वाले संत प्रेमानंद महाराज के लिए मध्यप्रदेश के नर्मदापुर जिले के इटारसी निवासी एक मुस्लिम युवक ने अपनी किडनी दान करने की पेशकश की है।

यह युवक हैं आरिफ खान चिश्ती। उन्होंने प्रेमानंद महाराज के नाम एक पत्र लिखा और उसे मेल व व्हाट्सएप के माध्यम से संत के प्रतिनिधियों तक पहुँचाया। अपने पत्र में आरिफ ने लिखा, ‘महाराज जी, मैं आपके वीडियो देखता हूं और आपके आचरण से गहराई से प्रभावित हूं। आप न केवल कृष्ण-भक्त हैं बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक भी हैं। आज जब समाज में नफरत का जहर फैलाया जा रहा है, आप प्रेम और शांति की मशाल लेकर खड़े हैं। मीडिया से पता चला कि आपकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं। आपके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हूं। ऐसे संतों का इस धरती पर बने रहना जरूरी है। इसलिए मैं अपनी एक किडनी आपको स्वेच्छा से दान करना चाहता हूं। यह मेरी तरफ से एक छोटा-सा उपहार होगा, कृपया स्वीकार करें।’

आरिफ के इस पत्र ने मानो इंसानियत का नया अध्याय लिख दिया। हालांकि प्रेमानंद महाराज ने आरिफ की इस पेशकश को विनम्रता के साथ अस्वीकार कर दिया। उन्होंने आरिफ का आभार जताते हुए कहा, ‘यह आपकी नेकदिली और सच्चे मन का प्रमाण है। मैं आपकी इस भावना को प्रणाम करता हूं।’

संत के प्रतिनिधियों ने बताया कि महाराज ने आरिफ को जल्द ही वृंदावन बुलाने की इच्छा भी जताई है, ताकि उन्हें व्यक्तिगत रूप से आशीर्वाद दिया जा सके।

गौरतलब है कि प्रेमानंद महाराज वृंदावन में राधारानी और कृष्ण भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके दर्शन के लिए रोज़ हजारों श्रद्धालु पहुँचते हैं। परिक्रमा के दौरान जिस धरा पर उनके कदम पड़ते हैं, भक्त उस धूल को माथे से लगाते हैं। वर्तमान में महाराज ऑटोसोमल डोमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिज़ीज़ से पीड़ित हैं और उनकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहित बलाडिया कहते हैं, ‘इस घटना ने यह दिखा दिया कि धर्म और जाति की सीमाओं से परे मानवता सबसे बड़ा धर्म है। जब एक मुस्लिम युवक हिंदू संत के लिए अपनी किडनी दान करने को तैयार हो सकता है, तो यह कौमी एकता की उस गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक है, जिस पर भारत को गर्व है।’

सामाजिक कार्यकर्ता सचिन कौशिक भी इस पहल को अनूठी बतात हैं। कौशिक कहते हैं, ‘यह उदाहरण हमें याद दिलाता है कि नफरत की राजनीति चाहे कितनी भी बढ़ जाए, लेकिन ज़मीनी हकीकत यही है कि हिंदू और मुसलमान एक-दूसरे की तकलीफ में साथ खड़े होते हैं।’



