





एमएल शर्मा.
राजस्थान में विवादों में रही एसआई भर्ती परीक्षा 2021 आखिरकार राजस्थान उच्च न्यायालय ने रद्द कर दी। दिन रहा गुरुवार, तारीख रही 28 अगस्त 2025, जब हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में न्यायमूर्ति समीर जैन ने इस संबंध में दायर याचिका को निस्तारित करते हुए निर्णय किया। हालांकि, मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद गत 14 अगस्त को न्यायाधिपति ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 28 अगस्त का दिन मुकर्रर किया था। आज निर्णय के साथ ही तकरीबन चार सालों से चली आ रही जद्दोजहद का पटाक्षेप हो गया।

दरअसल, राज्य सरकार ने वर्ष 2021 में एसआई के 859 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था जिसमें 7 लाख 97 हजार युवाओं ने आवेदन पत्र भरा था। लिखित परीक्षा 13 से 15 सितंबर 2021 को करवाई गई जिसमें 3 लाख 80 हजार अभ्यर्थियों ने भाग लिया। तत्पश्चात 24 दिसंबर 2021 को परिणाम जारी कर 20 हजार 359 युवाओं को शारीरिक दक्षता परीक्षा के योग्य घोषित किया गया। फिर 12 से 18 फरवरी 2022 तक फिजिकल टेस्ट कर 11 अप्रैल 2022 को नतीजे आए जिसमें 3291 आवेदकों को साक्षात्कार के योग्य माना। साक्षात्कार के बाद 1 जून 2023 को अंतिम परिणाम जारी किया गया। परीक्षा 746 एसआई, 65 एसआई आईबी, 38 प्लाटून कमांडर व 11 एसआई एमबीसी पदों की हुई।

अब आया मामले में नया मोड़। यद्यपि, परीक्षा में पेपर लीक के आरोप शुरू में ही लगने लगे थे पर विरोध के स्वर इतने मुखरित नहीं हुए थे। इसमें सरकार ने कोई सरोकार रखना मुनासिब नहीं समझा। फलस्वरूप, विरोध दिनों दिन तेज होता गया। इस दौरान सूबे की सरकार बदल गई। कोई राहत मिलती ना देख अभ्यर्थी न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर हो गए। नतीजन, हाईकोर्ट की जयपुर बैच में याचिका दायर की गई।

खास बात है की प्रकरण की जांच एजेंसी एसओजी ने भर्ती रद्द करने की अनुशंसा की लेकिन ‘हुक्मरानों’ ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। याचिका दायर होने के बाद न्यायालय ने नव चयनित युवाओं की ‘पासिंग आउट परेड’ व ‘फील्ड पोस्टिंग’ पर रोक लगा दी थी। जांच के दौरान अनुसंधान एजेंसी ने 50 ट्रेनी एसआई, दो आरपीएससी मेंबर सहित 150 लोगों को गिरफ्तार किया था जिसको लेकर परस्पर विरोधाभासी बयानबाजी खूब मुखर हुई थी।

सियासी गलियारे में न्यायालय का निर्णय आते ही बयान बाजी का शिगुफा ऐसा उछला कि पक्ष और विपक्ष तू-तड़ाक पर उतारू हो गए। सोशल मीडिया पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा व आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल का एक ऑडियो वीडियो खूब वायरल हुआ। उच्च न्यायालय के निर्णय सुनाने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सत्ताधारी दल के नेता टुकड़ों में बंटे हैं जो एक दूसरे के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। इतना बड़ा मुद्दा जिस पर हाईकोर्ट ने फैसला दिया है उस पर ‘वजीर ए आला’ कुछ नहीं बोले। हाईकोर्ट की आरपीएससी को अपनी कार्य प्रणाली सुधारने की नसीहत देने के तथ्य पर डोटासरा ने कहा कि दाल में काला नहीं यहां पूरी दाल ही काली है।

उधर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, महज इतना वक्तव्य देकर पल्ला झाड़ लिया। परंतु, कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि अयोग्य व्यक्ति का चयन होना योग्य व्यक्ति के लिए सही नहीं है। जो योग्य युवा पेपर लीक व परीक्षा में धांधली की वजह से नियोजन से वंचित हो गया वो पूरी तरह गलत है।

बहरहाल, एक दूसरे पर कीचड़ उछलने का यह ‘सियासी खेल’ हर बार की तरह इस बार भी बदस्तूर जारी है। आगे क्या होना है और क्या होगा? यह तो भविष्य के गर्भ में है। फिलहाल, एक पक्ष जहां इसे न्याय की जीत बता रहा है वही दूसरी तरफ जो अभ्यर्थी अपनी योग्यता के आधार पर चयनित हुए हैं उनमें घोर निराशा है। सवाल उठता है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल को करीब 2 वर्ष होने को है लेकिन बावजूद इसके प्रकरण में इतनी शिथिलता बरतना समझ से परे हैं।
-लेखक वरिष्ठ अधिवक्ता और समसामयिक मसलों पर स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं




