




भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
हनुमानगढ़ ज़िले में ट्रक ऑपरेटरों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। टिब्बी में शुरू हुआ धरना लगातार जारी है और माहौल गरमाता जा रहा है। टिब्बी ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र धारणियां के नेतृत्व में चल रहे इस धरने में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि 25 अगस्त तक प्रशासन ने ओवरलोडिंग पर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो जिले के दो हजार ट्रकों की चाबियां सीधे जिला कलक्टर को सौंप दी जाएंगी।

ऑपरेटरों का आरोप है कि ट्रकों की जगह धड़ल्ले से चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और ओवरलोडेड वाहन उनकी आजीविका छीन रहे हैं। अध्यक्ष रविंद्र धारणियां ने ‘भटनेर पोस्ट डॉट कॉम’ से कहा, ‘हम वैध कारोबार कर रहे हैं, मगर ओवरलोडिंग ने हमें हाशिये पर धकेल दिया है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों की किश्तें न चुका पाने की स्थिति में ट्रक जब्ती के कगार पर हैं।’

आरोप है कि खनन और परिवहन विभाग की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। बीकानेर से आने वाले 150 टन माल की रॉयल्टी मात्र 380 क्विंटल दिखा दी जाती है, शेष माल अवैध रास्तों से जाता है और करोड़ों रुपये का राजस्व सीधे जेबों में चला जाता है। नतीजा यह कि सरकार को भारी नुकसान, सड़कों की बर्बादी और हादसों का ख़तरा तीनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं।
धरने में शामिल ऑपरेटरों का कहना है कि यह संघर्ष केवल उनका नहीं है। यदि ट्रक बंद हो गए, तो जिले के हज़ारों परिवार बेरोजगारी और भूखमरी की चपेट में आ जाएंगे। किसानों और उद्योगपतियों के लिए परिवहन महंगा होगा और सरकार का टैक्स-रॉयल्टी भी ठप पड़ जाएगी।

धरना अब केवल टिब्बी तक सीमित नहीं है। हनुमानगढ़, पीलीबंगा, रावतसर और सरदारशहर की यूनियनें भी मैदान में हैं। कोहला टोल नाका समेत कई जगह धरनों की तैयारी चल रही है। अंदेशा है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी विस्फोट का रूप ले सकता है।

असल सवाल यही है, जब नियम पहले से मौजूद हैं, तो ओवरलोडिंग पर अंकुश क्यों नहीं लगाया जा रहा? जानकारों का कहना है कि इस मसले पर विभागीय चुप्पी और प्रशासनिक ढिलाई ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है। ट्रक यूनियनों का यह आंदोलन सरकार के लिए सिर्फ़ चेतावनी नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की साख पर भी सीधा सवाल है।



