




भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
हनुमानगढ़ के दिल दहला देने वाले सीवरेज चैंबर हादसे ने एक ओर जहां पुलिस की मानवता और मजदूर की साहसिक कार्रवाई का जीवंत उदाहरण पेश किया, वहीं दूसरी ओर हमारी व्यवस्था की लापरवाह हकीकत को भी उजागर कर दिया। 14 अगस्त की सुबह रिलायंस मॉल के पास तीन मजदूर जहरीली गैस की गिरफ्त में बेहोश होकर मौत के मुहाने पर जा पहुंचे, तो उनकी जिंदगी और मौत के बीच की दूरी मिटाने में एक पुलिस जवान की सजगता और एक साथी मजदूर की बहादुरी ने निर्णायक भूमिका निभाई। लेकिन इस पूरी घटना ने यह भी साबित कर दिया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और आपात उपकरणों की कमी आज भी हमारी प्रशासनिक तैयारी की सबसे कमजोर कड़ी है।

जंक्शन के कलक्ट्रेट मार्ग पर स्थित रिलायंस मॉल के पास सीवरेज चैंबर की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आकर तीन मजदूर बेहोश हो गए। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 10 बजे, तीन मजदूर सफाई कार्य के लिए सीवरेज चैंबर में उतरे थे। सफाई के दौरान अचानक जहरीली गैस के असर से उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और वे जोर-जोर से रोने लगे। उसी समय पास से गुजर रहे पुलिस जवान सुभाष मांझू ने मदद के लिए उठी चीखें सुनीं। बिना देर किए वे मौके पर पहुंचे, हालात का अंदाजा लगाया और तुरंत एम्बुलेंस को बुलाया। सुभाष मांझू ने हिम्मत दिखाते हुए एक मजदूर को बाहर निकाला और अस्पताल भिजवाया, जिससे दो की जान समय रहते बच गई।

दूसरी ओर, चैंबर में पहले से मौजूद दो मजदूरों तक पहुंचने में करीब आधे घंटे का समय लग गया। हालांकि दूसरी एम्बुलेंस समय पर पहुंच गई थी, लेकिन उसमें चैंबर में उतरने योग्य अतिरिक्त ऑक्सीजन सिस्टम नहीं था। इस कारण रेस्क्यू टीम अंदर नहीं जा पाई और मजदूर जहरीली गैस के माहौल में फंसे रहे। मौके पर मौजूद लोगों के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही थी, लेकिन प्रशासनिक अमला बेबस नज़र आया।

हादसे की सूचना पाकर विधायक गणेशराज बंसल, नगर परिषद आयुक्त सुरेंद्र यादव, भाजपा नेता अमित चौधरी, पूर्व सभापति सुमित रणवां व पीसीसी सचिव व जिला परिषद सदस्य मनीष मक्कासर आदि मौके पर पहुंचे। भीड़ लगातार बढ़ रही थी और हर कोई मजदूरों को जल्द बाहर निकालने की मांग कर रहा था, मगर उपकरणों की कमी ने बचाव कार्य को धीमा कर दिया।
इसी बीच नगर पालिका के ठेके पर कार्यरत एक अन्य मजदूर मलकीत सिंह ने साहस दिखाया। उन्होंने मुंह पर रुमाल बांधा और बिना किसी उन्नत सुरक्षा उपकरण के चैंबर में उतर गए। उनकी बहादुरी ने हालात बदल दिए, दोनों बेहोश मजदूरों को बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने बताया कि दो मजदूरों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर है।

बेहोश हुए मजदूरों में कमलजीत सिंह, निवासी सेक्टर-12, करण सिंह, निवासी टाउन व सूरज, निवासी सेक्टर-12 शामिल हैं। तीनों नगर पालिका के ठेकेदार के अधीन सीवरेज सफाई कार्य में लगे थे।
कांग्रेस नेता मनीष मक्कासर ने कहाकि यह हादसा एक बार फिर सीवरेज सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी को सामने लाता है। जहरीली गैस के खतरे को लेकर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन आज भी न तो गैस डिटेक्टर उपलब्ध होते हैं और न ही चैंबर में उतरने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन सिस्टम।

स्थानीय लोगों का कहना था कि अगर रेस्क्यू उपकरण मौके पर होते तो आधे घंटे की देरी टाली जा सकती थी। यह देरी मजदूरों की जिंदगी के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकती थी। घटना के बाद घटनास्थल पर अफरातफरी, चिंता और आक्रोश का माहौल रहा। लोग आपस में चर्चा कर रहे थे कि प्रशासन की इस लापरवाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कुछ लोगों ने कहा कि हर सफाई से पहले गैस की जांच और सुरक्षात्मक उपकरण अनिवार्य किए जाएं, तभी ऐसे हादसे रुक सकते हैं।

