




डॉ. संतोष राजपुरोहित.
कुछ साल पहले तक पैसे भेजने या लेने के लिए हमें बैंक जाना पड़ता था, लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता था और छुट्टे-पैसे का झंझट अलग। लेकिन अब मोबाइल में कुछ क्लिक करते ही पैसों का लेन-देन हो जाता है। यह बदलाव सिर्फ सुविधा भर नहीं है, बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था को गहरे स्तर पर बदल रहा है। डिजिटल भुगतान यानी कैशलेस ट्रांजैक्शन अब आम आदमी की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है।

2016 में नोटबंदी के बाद और फिर कोरोना महामारी के दौरान डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा। पहले जहां लोग नकद भुगतान पर ज्यादा भरोसा करते थे, वहीं अब सब्ज़ी वाले, चाय वाले और यहां तक कि रिक्शा चालक भी क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान लेने लगे हैं। यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने पैसे भेजना इतना आसान बना दिया है कि अब न बैंक जाने की जरूरत है और न ही एटीएम की लाइन में लगने की।

डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड बनता है। इससे धोखाधड़ी कम होती है और टैक्स चोरी पर भी लगाम लगती है। दुकानदारों के लिए भी यह फायदेमंद है क्योंकि उन्हें नकदी संभालने का झंझट नहीं रहता और चोरी का खतरा भी कम हो जाता है।

डिजिटल भुगतान से न सिर्फ समय बचता है बल्कि छोटे-छोटे खर्चे भी आसानी से हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, पहले अगर आपको किसी को ₹50 देने होते, तो छुट्टे ढूंढना मुश्किल होता, लेकिन अब मोबाइल से तुरंत पेमेंट हो जाता है। बिल भरना, मोबाइल रिचार्ज करना, बिजली का भुगतान करना, ये सब काम घर बैठे हो जाते हैं।
पहले डिजिटल लेन-देन सिर्फ शहरों तक सीमित था, लेकिन अब गांवों में भी इसका असर दिखने लगा है। सरकार और बैंकों की पहल से ग्रामीण इलाकों में भी यूपीआई और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल बढ़ा है। किसान अपने उत्पाद का भुगतान सीधे बैंक खाते में पा रहे हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हो रही है।

डिजिटल भुगतान से देश की अर्थव्यवस्था को कई तरह से फायदा होता है। नकद पर निर्भरता घटने से नकदी छापने और उसे संभालने का खर्च कम होता है। साथ ही, हर ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड होने से सरकार को टैक्स कलेक्शन में मदद मिलती है, जिससे सार्वजनिक सेवाओं और विकास कार्यों में निवेश बढ़ सकता है।

हालांकि डिजिटल भुगतान के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी, साइबर फ्रॉड का खतरा और डिजिटल साक्षरता की कमी अभी भी कई लोगों को इसका पूरा फायदा उठाने से रोकती है। बुजुर्गों और अनपढ़ लोगों को मोबाइल पेमेंट का सही इस्तेमाल सिखाना भी जरूरी है।

भारत में डिजिटल भुगतान का भविष्य उज्ज्वल है। सरकार, आरबीआई और निजी कंपनियां लगातार नई तकनीक ला रही हैं ताकि यह और सुरक्षित, तेज़ और आसान बने। 5जी इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से पेमेंट सिस्टम और भी स्मार्ट हो जाएगा। अगर सुरक्षा और जागरूकता पर ध्यान दिया जाए तो आने वाले समय में नकद पैसों का इस्तेमाल बेहद कम हो सकता है।
डिजिटल भुगतान ने हमारे लेन-देन का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। यह न केवल समय और मेहनत बचाता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाता है। अब हमारा बैंक हमारी जेब में है, और पैसों का लेन-देन उतना ही आसान है जितना किसी को फोन करना। आने वाले समय में कैशलेस इंडिया का सपना शायद बहुत दूर नहीं।
-लेखक भारतीय आर्थिक परिषद के सदस्य हैं

