




भटनेर पोस्ट डेस्क.
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्यभर में न्यायिक प्रणाली को और मजबूत व पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए सभी 42 जजों को अलग-अलग जिलों और न्याय क्षेत्रों की गार्जियनशिप (अभिभावकत्व) सौंप दी है। इसके तहत हनुमानगढ़ जिले की अदालतों का अभिभावकत्व अब हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस कुलदीप माथुर को मिला है। चीफ जस्टिस के.आर. श्रीराम द्वारा 5 अगस्त को जारी आदेश के अनुसार, जस्टिस कुलदीप माथुर जिले के न्यायिक अधिकारियों की कार्यशैली, अनुशासन, कार्यकुशलता और ईमानदारी पर सीधी नजर रखेंगे। वे समय-समय पर जिले का दौरा करेंगे, अदालतों की कार्यप्रणाली का निरीक्षण करेंगे और यदि किसी स्तर पर सुधार की आवश्यकता होगी तो सुझाव देंगे। सभी महत्वपूर्ण जानकारियां वे सीधे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजेंगे।

क्या है गार्जियनशिप व्यवस्था
गार्जियनशिप का मतलब है कि हाईकोर्ट का कोई एक जज किसी जिले की अदालतों का मार्गदर्शक और संरक्षक बनकर उनकी निगरानी करता है। इसका उद्देश्य है कि अदालतों का कामकाज पारदर्शी, समयबद्ध और ईमानदारी से हो। यदि किसी कोर्ट में काम की गति धीमी है, अनुशासन संबंधी समस्याएं हैं या न्याय की गुणवत्ता को लेकर सवाल हैं, तो गार्जियन जज तुरंत हस्तक्षेप कर सुधार के दिशा-निर्देश देते हैं।

हनुमानगढ़ में क्या बदलेगा
अब जिले की अदालतों में होने वाले कामकाज की मॉनिटरिंग सीधे हाईकोर्ट स्तर से होगी। जस्टिस कुलदीप माथुर जरूरत पड़ने पर हनुमानगढ़ आकर न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात करेंगे, लंबित मामलों की स्थिति, सुनवाई की गति और फैसलों की गुणवत्ता पर बात करेंगे। यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता की शिकायत आती है, तो उस पर भी त्वरित कार्रवाई होगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर कदम
पूर्व में कुछ जजों के रिटायरमेंट, स्थानांतरण और पदोन्नति के चलते कई जिलों में गार्जियनशिप खाली हो गई थी। इस पुनर्वितरण के साथ पुराने सभी आदेश निरस्त कर दिए गए हैं और नई सूची तत्काल लागू कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हनुमानगढ़ जैसे सीमावर्ती जिले में यह व्यवस्था न्यायिक पारदर्शिता और जवाबदेही को नई मजबूती देगी। इससे न केवल अदालतों में कार्य की गति बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी और मजबूत होगा।



